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हेमंत सोरेन की विधायकी गई तो राज्य में लगेगा राष्ट्रपति शासन- सरयू राय

जमशेदपुर : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधायकी गई तो राज्य में राष्ट्रपति शासन की प्रबल संभावना है.

इस बात की जानकारी जमशेदपुर पूर्वी के विधायक और पूर्व मंत्री सरयू राय ने दी.

पूर्व मंत्री सरयू राय ने कहा कि आनेवाले दिनों में झारखंड में राष्ट्रपति की शासन की प्रबल संभावना है.

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने यदि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की

विधानसभा सदस्यता रद्द करने की सिफारिश कर दी तो

राज्य में राष्ट्रपति शासन की संभावना काफी बढ़ जाएगी.

सरयू राय ने कहा कि राज्य में राजनैतिक अस्थिरता का दौर चल रहा है.

यदि महागठबंधन टूटता है तो राष्ट्रपति शासन लगने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.

जानिये सरयू राय ने और क्या कहा

सरयू राय ने कहा कि चुनाव आयोग में सुनवाई पूरी हो गई है, अब नतीजा आने वाला है.

अगर चुनाव आयोग ये सिफारिश करेगा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

विधायक बनने योग्य नहीं है तो उनके स्थान पर कोई और मुख्यमंत्री बनेगा.

गठबंधन का बहुमत है. तीन विधायक जो अभी जेल से छूटे हैं तो भी कांग्रेस के साथ हैं.

ये लोग किसी और को नेता चुन कर गठबंधन की सरकार चला सकते हैं.

हेमंत सोरेन के परिवार से भी कोई हो सकता है. या जेएमएम का कोई बड़ा नेता सीएम हो सकता है. मगर राज्य में अस्थिरता आ ही गई है. जब वे अयोग्य साबित हो जायेंगे तो ये भी हो सकता है कि गठबंधन टूट भी सकता है. अगर गठबंधन टूट गया तो झारखंड में राष्ट्रपति शासन लग सकता है.

हेमंत सोरेन से जुड़े खदान लीज मामले में चुनाव आयोग में सुनवाई पूरी

सीएम हेमंत सोरेन के खनन लीज मामले में चुनाव आयोग में सुनवाई पूरी हो चुकी है. सीएम हेमंत सोरेन और भाजपा की ओर से वकीलों ने दलीलें पेश की. बहस की कॉपी बाकायदा लिखित रूप से चुनाव आयोग को सौंप दिया गया. अब चुनाव आयोग मामले पर विचार कर किसी भी दिन अपने फैसले की घोषणा कर सकता है. यह भी हो सकता है कि फैसले की घोषणा करने से पहले आयोग फैसले की तारीख तय करे.

12 अगस्त को हुई थी सुनवाई

इससे पहले चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर 12 अगस्त को सुनवाई की थी. निर्वाचन आयोग की तरफ से सीएम हेमंत सोरेन के अधिवक्ता से लिखित सबमिशन मांगा गया था.

वरीय अधिवक्ता मिनाक्षी अरोड़ा ने निर्वाचन आयोग के समक्ष दो घंटे तक अपने मुवक्किल सीएम हेमंत सोरेन की तरफ से बहस की थी. उन्होंने कहा था कि हेमंत सोरेन के नाम से रांची के अनगड़ा में आवंटित स्टोन माइंस का मामला लोक प्रतिनिधित्व कानून 1951 के 9 ए के दायरे में नहीं आता है. इस पर शिकायतकर्ता पार्टी भाजपा की तरफ से पुष्ट दलीलें दी गयीं.

भाजपा की तरफ से बहस में शामिल हुए अधिवक्ता ने कहा कि लोक प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 9 ए के तहत सीएम हेमंत सोरेन की विधानसभा की सदस्यता रद्द करने का पर्याप्त आधार है. सुनवाई के दौरान यह कहा गया था कि झारखंड के मुख्यमंत्री के नाम से आवंटित खनन पट्‌टे की ही तरह कई अवैध खनन पट्‌टे राज्य में लोगों को दिये गये हैं.

हेमंत सोरेन के भाई बसंत से जुड़े मामले भी चुनाव आयोग के समक्ष

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भाई और दुमका से झामुमो विधायक बसंत सोरेन से जुड़ा मामला भी चुनाव आयोग के समक्ष है. हेमंत सोरेन और उनके भाई बसंत सोरेन के नाम पर पत्थर खदान लीज की शिकायत झारखंड बीजेपी नेताओं ने चुनाव आयोग से की थी. झारखंड प्रदेश भाजपा की तरफ से लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 9ए के तहत मुख्यमंत्री को विधायकी से अयोग्य ठहराने के लिये राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया था. फिलहाल यह पूरा मामला चुनाव आयोग के समक्ष है.

रिपोर्ट: लाला जब़ी

श्रीमती की सरकार पर कोई आश्चर्य नहीं-सरयू राय

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