रेल टेका डहर छेका’ Kurmi Protest in Jharkhand : टाटीसिलवे स्टेशन और कोयलांचल के कई अन्य रेलवे स्टेशनों पर कुर्मी समाज के लोगों ने ‘रेल टेका डहर छेका’ आंदोलन शुरू कर दिया है। सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी रेलवे ट्रैक पर बैठकर और लेटकर अपनी मांगें केंद्र सरकार तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। इस आंदोलन के कारण कई ट्रेनें रुकी हुई हैं और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
टाटीसिलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में लोग जुटे हैं और समय के साथ उनकी संख्या बढ़ती जा रही है। विशेष रूप से महिलाओं की उपस्थिति बढ़कर नजर आ रही है। प्रदर्शनकारी ट्रैक पर बैनर और झंडे लगाए हुए हैं, और नारेबाजी करते हुए अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं।
Key Highlights:
झारखंड के टाटीसिलवे स्टेशन सहित कई स्टेशनों पर कुर्मी समाज के लोगों ने रेलवे ट्रैक जाम किया।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल, रेलवे ट्रेनों का परिचालन बाधित।
आंदोलन की मुख्य मांगें: Kurmali भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करना, परंपरागत पेशा कानून लागू करना और अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) में शामिल होना।
रेल टेका डहर छेका आंदोलन अनिश्चितकालीन है; प्रदर्शनकारी अपनी मांगों के पूर्ण होने तक ट्रैक पर बने रहेंगे।
आरपीएफ और रांची पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए, लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने के लिए सतर्कता।
कुर्मी समाज ने बताया कि पिछले 75 वर्षों से उनकी पहचान और अधिकारों को नजरअंदाज किया गया।
‘रेल टेका डहर छेका’ Kurmi Protest in Jharkhand सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं ताकि लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बनाए रखी जा सके। इसके बावजूद आंदोलनकारियों का प्रदर्शन जारी है।
कुर्मी समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह आंदोलन पिछले 75 वर्षों से उनके अधिकार और पहचान के लिए किया जा रहा संघर्ष का हिस्सा है। उन्होंने अपनी तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
‘रेल टेका डहर छेका’ Kurmi Protest in Jharkhand प्रतिनिधियों का कहना है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी तीनों मांगें पूरी नहीं होती। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से यह चेतावनी भी दी कि उनके अधिकारों की अनदेखी करना न्यायसंगत नहीं है।
कुर्मी समाज ने यह भी बताया कि उनकी जमीनें और संसाधन कई बड़े प्रोजेक्टों और कॉरपोरेट्स के लिए अधिग्रहित किए जा रहे हैं। यदि कुर्मी समाज अनुसूचित जनजाति में शामिल होते, तो उनके अधिकारों की रक्षा होती।
इस बीच, राजधानी रांची में आदिवासी समाज ने इस आंदोलन का विरोध करते हुए राजभवन के पास धरना दिया। दोनों पक्षों के शांतिपूर्ण और सुरक्षित प्रदर्शन को बनाए रखने के लिए पुलिस सतर्क है।


















