Ranu Devi Daughter Engineering PhD, रांची: मां के हाथों में झाड़ू-पोछा था, लेकिन आंखों में बच्चों के बेहतर भविष्य का सपना। आर्थिक तंगी और पति के निधन के बाद तीन बच्चों की जिम्मेदारी उठाने वाली रानू देवी ने हार नहीं मानी। बीआईटी मेसरा में पिछले 26 वर्षों से सफाई का काम कर उन्होंने परिवार का भरण-पोषण किया और बच्चों की पढ़ाई जारी रखी। अब उनकी बेटी आरती कुमारी ने उसी संस्थान से इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री हासिल कर परिवार के संघर्ष को गौरवपूर्ण उपलब्धि में बदल दिया है। आरती की सफलता न केवल उनकी मेहनत और लगन की कहानी है, बल्कि मां के त्याग और शिक्षा के प्रति उनके विश्वास को भी दर्शाती है।
सप्ताह में 400 रुपये से शुरू हुआ सफर, अब 15 हजार रुपये मासिक वेतन
रानू देवी ने जब बीआईटी मेसरा में काम शुरू किया था, तब उन्हें सप्ताह में 400 रुपये मिलते थे। वर्तमान में उनका वेतन 15 हजार रुपये प्रतिमाह है। पति के निधन के बाद तीन बच्चों की परवरिश और उनकी शिक्षा की जिम्मेदारी अकेले निभाना उनके लिए आसान नहीं था। सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी और कठिन परिस्थितियों में भी उनके भविष्य को बेहतर बनाने का प्रयास जारी रखा।
छात्रवृत्ति के सहारे आरती ने पूरी की उच्च शिक्षा
रांची के तुरुप गांव की रहने वाली आरती कुमारी तीन भाई-बहनों में मझली हैं। आर्थिक कठिनाइयों के बीच उनकी उच्च शिक्षा में बीआईटी मेसरा और सरकार की ओर से मिली छात्रवृत्ति ने अहम मदद की। आरती ने आरटीसी से बीटेक और बीआईटी मेसरा से एमटेक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद शोध कार्य जारी रखते हुए उन्होंने इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री हासिल की। उनकी यह उपलब्धि लंबे समय तक की गई मेहनत और शिक्षा के प्रति समर्पण का परिणाम है।
तुरुप गांव की पहली महिला बनीं इंजीनियरिंग में पीएचडी धारक
आरती कुमारी अपने गांव तुरुप की पहली महिला हैं, जिन्होंने इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री हासिल की है। बीआईटी मेसरा के दीक्षांत समारोह में मिली इस उपलब्धि ने उनके परिवार के लिए गर्व का क्षण बनाया। जिस संस्थान में उनकी मां ने 26 वर्षों तक सफाई का काम कर परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं, उसी संस्थान से बेटी ने इंजीनियरिंग में शोध की उच्चतम डिग्री हासिल की। यह उपलब्धि मां-बेटी के संघर्ष, धैर्य और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता की प्रेरक मिसाल है।
मां के संघर्ष और बेटी की मेहनत ने लिखी सफलता की कहानी
रानू देवी ने सीमित आय और पारिवारिक कठिनाइयों के बीच बच्चों की शिक्षा को जारी रखा। वहीं, आरती ने छात्रवृत्ति और अपनी मेहनत के सहारे उच्च शिक्षा का सफर पूरा किया। आरती की सफलता यह संदेश देती है कि आर्थिक चुनौतियां कठिन जरूर होती हैं, लेकिन शिक्षा, निरंतर प्रयास और परिवार के सहयोग से आगे बढ़ने के रास्ते बनाए जा सकते हैं। उनकी उपलब्धि उनके परिवार के साथ-साथ तुरुप गांव के लिए भी गर्व का विषय है।
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