उत्पाद सिपाहियों की भर्ती :पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार अभी तक कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया:डीजीपी 

रांची:झारखंड के डीजीपी ने न्यूज़ 22 स्कोप के संवाददाता मनीष कुमार वर्मा से हाल के घटनाक्रम को लेकर लंबी बातचीत की। डीजीपी ने बातचीत के क्रम में उत्पाद सिपाहियों की भर्ती में अभ्यर्थियों की हो रही लगातार मौत और उसके बाद उठाए गए प्रशासनिक कदमों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कई महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि प्रशासन और सरकार अभ्यर्थियों के साथ है और अभी इसी को देखते हुए सरकार ने बहाली प्रक्रिया को फिलहाल रोकने का निर्णय लिया है। अन्य कई मुद्दों पर भी डीजीपी ने अपनी बात रखी। प्रस्तुत है डीजीपी से न्यूज़ 22 स्कोप की बातचित के प्रमुख अंश:

मनीष: सर, सबसे पहले तो मैं जानना चाहूंगा कि हाल ही में जो अभ्यर्थियों की मौतें हो रही हैं, इसके बारे में आपकी क्या राय है? अभी तक 12 मौतें हो चुकी हैं। इन मौतों के पीछे का कारण क्या हो सकता है?

अनुराग गुप्ता (डीजीपी): पहले तो मैं उन परिवारों के साथ पूरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूँ जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है। यह बहुत ही दुखद स्थिति है। हमने पूरी तरह से जानने की कोशिश की है कि इसका कारण क्या हो सकता है। मुख्यमंत्री जी ने इस प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित कर दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार अभी तक कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। हम मानते हैं कि 10 किलोमीटर की दौड़ साधारण नहीं होती और पिछले 10-12 वर्षों से झारखंड में यह नियम लागू है। संभव है कि कुछ अभ्यर्थियों ने बिना उचित तैयारी के दौड़ में हिस्सा लिया हो, जिससे यह स्थिति उत्पन्न हुई।

मनीष: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कोई विशेष जानकारी मिली है?

अनुराग गुप्ता (डीजीपी): नहीं, अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट पूरी नहीं आई है। रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है और जब पूरी रिपोर्ट मिलेगी, तब हम उचित कार्रवाई करेंगे।

मनीष: कुछ अभ्यर्थियों का कहना था कि उन्हें दौड़ के दौरान आवश्यक सुविधाएं जैसे पानी और खाना नहीं मिला। क्या इस बारे में कोई व्यवस्था की गई थी?

अनुराग गुप्ता (डीजीपी): पानी, ओआरएस, डॉक्टर, नर्स, और अन्य मेडिकल सुविधाएं सभी सात सेंटरों पर उपलब्ध थीं। खाने की व्यवस्था नहीं थी, क्योंकि लाखों की संख्या में अभ्यर्थियों के लिए भोजन की व्यवस्था करना मुश्किल है। इसलिए, खाने का इंतजाम अभ्यर्थियों को स्वयं करना पड़ा।

मनीष: जब अभ्यर्थियों की हालत खराब हुई, तो उन्हें अस्पताल ले जाने में देरी की गई थी, क्या यह सही है?

अनुराग गुप्ता (डीजीपी): नहीं, ऐसा नहीं है। जैसे ही किसी अभ्यर्थी की हालत बिगड़ी, उसे तुरंत अस्पताल भेजा गया। चिकित्सा की त्वरित प्रक्रिया की गई, लेकिन कुछ मामलों में दुर्भाग्यवश अभ्यर्थी बच नहीं पाए।

मनीष: भविष्य में दौड़ की प्रक्रिया को लेकर क्या कदम उठाए जाएंगे?

अनुराग गुप्ता (डीजीपी): हम इस पर विचार कर रहे हैं कि दौड़ की प्रक्रिया को सुरक्षित और प्रभावी कैसे बनाया जाए। सभी पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा और सरकार के स्तर से निर्णय लिया जाएगा।

मनीष कुवा वर्मा: एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर आपने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। क्या आप इस पर कुछ प्रकाश डाल सकते हैं?

अनुराग गुप्ता (डीजीपी): हां, अब एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य हो गया है। विशेष रूप से महिला अपराध, बच्चों की गुमशुदगी, और अन्य गंभीर अपराधों की रिपोर्ट दर्ज करने में कोताही बरतने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मनीष: गांवों में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर अक्सर समस्याएं आती हैं। क्या इसके लिए कोई अवेयरनेस प्रोग्राम चलाया जा रहा है?

अनुराग गुप्ता (डीजीपी): हां, झारखंड लीगल सर्विस अथॉरिटी (झालसा) द्वारा पीएलवी और वॉलिंटियर के माध्यम से लोगों को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा, 10 सितंबर को पूरे राज्य में एक जनता पुलिस सम्मेलन आयोजित किया जाएगा जिसमें विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

मनीष: विधानसभा चुनावों के बारे में आपकी तैयारी कैसी है?

अनुराग गुप्ता (डीजीपी): हम पूरी तरह से तैयार हैं। पिछले चुनावों में शांति बनी रही है और नक्सलवाद की स्थिति को भी नियंत्रण में रखा गया है। चुनाव शांतिपूर्वक कराने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं और अधिकारियों के ट्रांसफर की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है।

मनीष: धन्यवाद, सर। आपने बहुत महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रकाश डाला।

अनुराग गुप्ता (डीजीपी): धन्यवाद, मनीष जी।

 

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