रिपोर्ट कार्ड के साथ तेजस्वी की ललकार, झुकती है सरकार, झुकाने वाला चाहिए, नागपुर के फंदे में नीतीश सरकार

Patna-बिहार सरकार का रिपोर्ट कार्ड- महागठबंधन की ओर से बिहार सरकार का रिपोर्ट कार्ड जारी करते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर एक बार फिर से बड़ा हमला बोला है. एक तरफ नीतीश कुमार जातीय जनगणना करवा कर तमाम दलित, वंचित और पिछड़ी जातियों में यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि जातीय जनगणना से उनकी चिरकालीन समस्यायों का समाधान होने वाला है, जातीय जनगणना के बाद  सरकार और सत्ता में सब की भागीदारी सुनिश्चित जाएगी. वहीं तेजस्वी यादव सरकार पर नागपुर से संचालित होने का बड़ा आरोप लगा रहे हैं. तेजस्वी यादव ने कहा है कि नीतीश कुमार नागपुर के फंदे में कैद है. हमें इसके खिलाफ लड़ाई लड़नी होगी. एकजूट होना होगा, सरकार झुकती है, सिर्फ झुकाने का जिगर होना चाहिए.

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गठबंधन नेताओं की उपस्थिति में जारी हुआ रिपोर्ट कार्ड

बता दें कि संपूर्ण क्रांति दिवस के अवसर पर महागठबंधन की ओर से सरकार का रिपोर्ट कार्ड जारी किया गया है, 32 पेज के रिपोर्ट कार्ड में सरकार की नाकामियां की गिनाई गयी. इस मौके पर राजद सुप्रीमो लालू यादव, जगतानंद सिंह, मनोज झा, तेजस्वी यादव, श्याम रजक के साथ ही सीपीआई के डी.राजा और सीपीआईएमएल के दीपांकर भट्टाचार्य भी मौजूद रहें.

1974 की तरह देश में उबाल है

इस अवसर पर तेजस्वी यादव ने कहा कि जो हालत देश में 1974 में था, एक बार फिर से देश उसी हालत में पहुंच चुका है. आज पूरे देश में असंतोष है. जनता त्राहिमाम है. 1974 में लालू यादव ने तब की तानाशाह सरकार को घुटने पर लाने का काम किया था. आज भी लालू यादव हमारे बीच है और उनके साथ हैं देश के बेरोजगारी के मारे युवा. सवाल सिर्फ सरकार को झुकाने की है. जिस सरकार ने 19 लाख रोजगार देने की घोषणा थी, उस सरकार की सच्चाई नीति आयोग के आंकड़ों ने खोल दी है. सरकार अपने ही ऐजंसी के द्वारा आंकड़ों को झुठला नहीं सकती.

जनविरोधी नीतियों का मुखालफत करने वाले विपक्षी दलों को बनाया जा रहा है निशाना

केन्द्र सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि जन विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले विरोधी दलों की सरकारों को केन्द्रीय एजेंसियों चुन चुन कर निशाना बना रही है, उनके मुंह को बंद करने के लिए गिरी हुई हरकत कर रही है, कभी ईडी तो कभी सीबीआई का भय दिखलाया जा रहा है. लेकिन राजद परिवार ईडी और सीबीआई की छापेमारी से डरने वाली नहीं है. इस कमरतोड़ मंहगाई और बेलगाम भ्रष्ट्राचार के खिलाफ अगस्त क्रांति के अवसर पर 7 अगस्त को राजधानी पटना से लेकर राज्य के सभी जिलों में विरोध मार्च निकालेगा.

रिपोर्ट कार्ड के आईने में बिहार सरकार

1 2004-05 की तुलना में 15 वर्षों के बाद भी 2019-20 में राष्ट्रीय आय की तुलना में पूर्व के स्तर कायम है. वर्ष 2003 में राष्ट्रीय वित्त आयोग जब बिहार आया, तो सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल एवं अन्य व्यापारिक संगठनों की माँग के बाद केन्द्र सरकार द्वारा क्षेत्रीय आर्थिक असंतुलन की खाई को पाटने के लिए वर्ष 2005 में 25000 करोड़ रूपए प्रतिवर्ष से शुरू होकर वर्ष 2022 में 1.5 लाख करोड़ रूपये प्रतिवर्ष तक की सहायता दी गयी. बावजूद इसके प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत की तुलना में जो 2005 में 32.58 प्रतिशत थी, लुढ़ककर 2022 में 32.36 प्रतिशत तक गिर गयी. जबकि शर्तो के अनुसार 15 वर्षों में उसे राष्ट्रीय औसत के बराबर, 100 प्रतिशत होना चाहिए था.

मानव विकास सूचकांक और लैंगिक विकास सूचकांक

बिहार राज्य मानव विकास सूचकांक में सबसे निचले स्थान पर है. मानव विकास सूचकांक के तीनों घटक शिक्षा, स्वास्थ्य और औसत प्रति व्यक्ति आय के बिहार का प्रदर्शन सबसे खराब है. बिहार में महिला सशिक्तकरण के दावे देश में 24 वें स्थान पर है, जो चिंता का विषय है.

3. कृषि रोडमैप और नेशनल काउंसलिंग ऑफ अप्लाइड इकोनामिक रिसर्च रिपोर्ट का दावा, बिहार में भ्रष्टाचार के कारण किसानों को नहीं मिल पाया लाभ.

यही कारण है कि 2000 से 2007 की तुलना में 2008 से 2016 के बीच बिहार की प्रति व्यक्ति आय में कमी देखी गई.

फसल विविधीकरण में कमी का मुख्य कारण व्यवस्था की कमी है. बिहार में 94% कृषि क्षेत्र में खाद्यान्न का उत्पादन होता है।

बहुआयामी गरीब और बिहार

बिहार में गरीबी 51.91%

कुपोषण 51.88 %

परिवार का कोई व्यक्ति 6 वर्ष की स्कूलिंग नहीं करने वाले परिवार 26.27% , गोबर ,लकड़ी, कोयला उपयोग करने वाले 63 फीसद, अपना शौचालय नहीं – 50.6 फीस.

पक्का घर नहीं – 65.3 फीसद

बेरोजगारी और लेबर पार्टिसिपेशन रेट

सीएमआईई रिपोर्ट के अनुसार जनवरी-मार्च 2022 बेरोजगारी दर 17.56 फीसद.

बिहार में लगभग एक करोड़ 86 लाख लोग बेरोजगार है, जो करीब 44% है ।

बिहार का स्वास्थ्य

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 19 राज्यों के सर्वे में बिहार 18वें स्थान पर है.

पीएचसी में लगभग 35% पद एएनएम के , 58% डॉक्टर ,69%

फार्मासिस्ट, 71% लैब टेक्नीशियन, 63% नर्सिंग स्टाफ के पद खाली.

रिपोर्ट- प्रणय/ शक्ति

Saffrn

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