खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से जुलाई में खुदरा महंगाई 4.45% पर पहुंच गयी। खाद्य महंगाई भी बढ़कर 5.52% हो गयी।
Retail Inflation रांची: देश में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने का असर खुदरा महंगाई पर साफ दिखने लगा है। बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में देश की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.45% हो गयी। जून में यह 4.38% थी। हालांकि जुलाई का आंकड़ा अर्थशास्त्रियों के 4.50% के अनुमान से थोड़ा कम है, लेकिन महंगाई दर लगातार दूसरे महीने चार प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है।
यह इस साल नये उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और नये कंजम्पशन बास्केट को अपनाने के बाद महंगाई का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं, यह भारतीय रिजर्व बैंक के चार प्रतिशत के तय लक्ष्य से भी ऊपर है।
Key Highlights
जुलाई में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.45% हुई।
जून में खुदरा महंगाई दर 4.38% थी।
खाद्य महंगाई 5.52% तक पहुंच गयी।
ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 5.79% रही।
तीसरी तिमाही में महंगाई के चरम पर पहुंचने का अनुमान।
Retail Inflation :खाद्य महंगाई बढ़कर 5.52% हुई
जुलाई में महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी रही। खाद्य महंगाई दर जून के 5.32% से बढ़कर जुलाई में 5.52% हो गयी। ग्रामीण आबादी पर इसका असर शहरी क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 5.79% दर्ज की गयी, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 5.05% रही।
Retail Inflation :जनवरी से लगातार बढ़ रही खुदरा महंगाई
खुदरा महंगाई में जनवरी से लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। जनवरी में यह 2.74%, फरवरी में 3.21%, मार्च में 3.40%, अप्रैल में 3.48% और मई में 3.93% थी। जून में यह बढ़कर 4.38% और जुलाई में 4.45% हो गयी।
महंगाई का यह लगातार बढ़ता रुझान घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा सकता है। खासकर खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी का असर ग्रामीण परिवारों पर ज्यादा पड़ने की आशंका है।
Retail Inflation :तीसरी तिमाही में चरम पर पहुंच सकती है महंगाई
भारतीय रिजर्व बैंक और आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि निकट भविष्य में मुख्य महंगाई दर में कुछ और बढ़ोतरी हो सकती है। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में महंगाई अपने चरम पर पहुंचने की संभावना जतायी जा रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में खाद्य पदार्थों की कीमतों और महंगाई के रुझान पर नजर रहेगी।
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