रिक्शा चालक ने रचा कीर्तिमान, भारतीय सेना के बाद वियतनाम में बने चैंपियन और अब रूस में पावरलिफ्टिंग में जीता स्वर्ण पदक
गया : पहले रिक्शा चालक फिर भारतीय सेना में सिपाही और अब लगातार इंटरनेशनल पावरलिफ्टिंग चैंपियन में जलवा। सफलता की यह बड़ी गाथा गया के अजय यादव ने लिखी है। गया जी के सुदूरवर्ती फतेहपुर प्रखंड के बथान गांव के रहने वाले अजय यादव एक बार फिर चैंपियन बने हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पावर लिफ्टिंग में अपनी जबरदस्त प्रतिभा दिखाते हुए अजय यादव ने स्वर्ण पदक हासिल कर लिया। इससे पहले वियतनाम में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए पावरलिफ्टिंग में स्वर्ण पदक जीता था। अजय यादव ने रूस में हुए फाइनल में ईरान को पराजित कर स्वर्ण पदक हासिल किया। इंटरनेशनल स्तर पर पावरलिफ्टिंग के बूते फेमस हो रहे हैं।

गरीब परिवार से निकले अजय ने दिखाया प्रतिभा का जलवा
अजय की जिंदगी संघर्षों से भरी रही है। किंतु अजय यादव ने हर मुश्किलों को मात देकर अपने आगे के सफर को आसान बनाया और आज पावरलिफ्टिंग क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय नाम हैं। एकदम से साधारण से परिवार से रहे अजय यादव के पिता रामबालक प्रसाद बैलगाड़ी चलाते थे। उनके परिवार की स्थिति काफी दयनीय थी। घर चलाना काफी मुश्किल था। पैसे के कारण अजय की शिक्षा भी प्रभावित हो रही थी। वहां जाकर छात्र जीवन के दौरान रिक्शा चलाया करते थे और अपने घर स्थिति को मजबूती प्रदान करते थे। किसी तरह से सरकारी स्कूल में उनकी पढ़ाई पूरी हुई। उन्होंने संघर्ष के बीच सेना में जान जाने की तैयारी की और फिर आखिरकार 2010 में उनका चयन भारतीय सेना में हुआ।

भारतीय सेना में चयन के बाद प्रतिभा को लगी पंख, वियतनाम और रूस में गाड़ा झंडा
भारतीय सेना में उनका चयन होने के बाद घर की आर्थिक स्थिति बदली। सेना में पहली पोस्टिंग असम में होने के बाद ट्रेनर ने उनकी प्रतिभा पहचानी। पावरलिफ्टिंग के क्षेत्र में उन्होंने मेहनत शुरू की, तो सफलता मिलनी शुरू हो गई। 2016 से पावरलिफ्टिंग में कई तरह की सफलताएं मिली। इस क्रम में अजय यादव ने 2025 में जुलाई महीने में वियतनाम में आयोजित पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भाग लिया और 82 किलोग्राम भार वर्ग में 260 किलोग्राम भार उठाकर स्वर्ण पदक जीता।
वहीं रूस में आयोजित पावरलिफ्टिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता है। इस चैंपियनशिप में 83 किलोग्राम भार वर्ग में 265 किलो भार उठाकर स्वर्ण पदक जीता। फाइनल मुकाबले में उनके सामने ईरान था. ईरान को हराकर अजय ने जीत का परचम लहराया और अपने देश का मान बढ़ाया. पिछले 6 महीने के भीतर अजय ने लगातार दूसरा स्वर्ण पदक जीता है।
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आशीष कुमार की रिपोर्ट
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