RRDA Vice-Chairman Order Cancelled: हाईकोर्ट ने ग्रामीण क्षेत्रों में Building Map Approval पर बड़ा फैसला सुनाया

झारखंड हाईकोर्ट ने ग्रामीण क्षेत्रों में भवन नक्शा पास करने पर आरआरडीए के अधिकार को अवैध बताते हुए उपाध्यक्ष व अपीलीय आदेश निरस्त कर सीलिंग हटाने का निर्देश दिया।


RRDA Vice-Chairman Order Cancelled रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने ग्रामीण क्षेत्रों में भवन नक्शा पास करने से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि झारखंड पंचायत राज अधिनियम से शासित क्षेत्रों में भवन योजना की स्वीकृति देने का अधिकार रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकार (आरआरडीए) को नहीं है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने कई रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह अहम आदेश दिया।

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RRDA Vice-Chairman Order Cancelled

अदालत ने आरआरडीए के उपाध्यक्ष द्वारा पारित उस आदेश को अवैध घोषित कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता के भवन को ध्वस्त करने और उस पर सील लगाने के निर्देश दिए गए थे। कोर्ट ने यह भी कहा कि अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा दिया गया आदेश भी अधिकार क्षेत्र के बिना पारित किया गया है, इसलिए वह भी रद्द किया जाता है।


Key Highlights 

  • झारखंड हाईकोर्ट ने ग्रामीण क्षेत्रों में भवन नक्शा पास करने पर आरआरडीए के अधिकार को अवैध बताया।

  • अदालत ने आरआरडीए उपाध्यक्ष और अपीलीय न्यायाधिकरण दोनों के आदेश निरस्त किए।

  • कोर्ट ने कहा कि पंचायत राज अधिनियम शासित क्षेत्रों में भवन स्वीकृति का अधिकार आरआरडीए को नहीं है।

  • याचिकाकर्ता की संपत्ति से सीलिंग हटाने और संरचना खोलने का निर्देश दिया गया।

  • आरआरडीए अधिकारियों पर 1000 रुपये का सांकेतिक हर्जाना लगाया गया।

  • याचिकाकर्ता चाहें तो नुकसान की भरपाई के लिए सिविल मुकदमा दायर कर सकते हैं।


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हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि 10 मई 2001 से झारखंड पंचायत राज अधिनियम-2001 लागू है और इस अधिनियम के तहत आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में झारखंड क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण अधिनियम के प्रावधान स्वतः लागू नहीं होते। संविधान की 11वीं अनुसूची और भाग-IX (Part IX) के प्रावधानों के आधार पर ऐसे क्षेत्रों में विकास योजनाओं को विनियमित करने का अधिकार पंचायत प्रणाली के पास है, न कि आरआरडीए के पास।

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कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि आरआरडीए द्वारा याचिकाकर्ता की संपत्ति को सील करने और निर्माण को गैरकानूनी घोषित करने की कार्रवाई अधिकार क्षेत्र के अभाव में की गई थी। इसलिए इसे गैरकानूनी माना गया और तत्काल प्रभाव से सीलिंग हटाने तथा संरचना खोलने का निर्देश दिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता द्वारा किया गया निर्माण केवल झारखंड पंचायत राज अधिनियम और उसके तहत बने नियमों के अनुसार ही विनियमित किया जा सकता है।

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नुकसान और क्षति के दावे पर अदालत ने कहा कि इस मामले में प्रत्यक्ष आदेश नहीं दिया जा सकता क्योंकि इसके लिए विस्तृत साक्ष्य और तथ्यात्मक जांच की जरूरत है। यदि याचिकाकर्ता चाहे तो अधिकार क्षेत्र के बिना कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सिविल मुकदमा दायर कर मुआवजे की मांग कर सकता है। हाईकोर्ट ने यह भी माना कि आरआरडीए के अधिकारियों ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई की है, इसलिए उन पर 1000 रुपये का सांकेतिक हर्जाना लगाया जाता है, जिसे चार सप्ताह के भीतर भुगतान करना होगा।

इस फैसले के बाद स्पष्ट हो गया है कि पंचायत राज अधिनियम से संचालित ग्रामीण इलाकों में भवन अनुमोदन और निर्माण संबंधी विनियमन केवल पंचायत प्रणाली और उसके अधिकृत नियमों के तहत ही होगा। ऐसे क्षेत्रों में आरआरडीए की हस्तक्षेप को हाईकोर्ट ने पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है।

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