सारण-वैशाली में बाढ़ सुरक्षा व कटावरोधी कार्यों का सचिव ने किया निरीक्षण, कटावरोधी कार्यों में तेजी लाने के निर्देश

पटना : जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह द्वारा बाढ़ 2026 पूर्व तैयारियों की समीक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चत करने के लिए राज्य के संवेदनशील स्थलों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। इस क्रम में आज उनके द्वारा सारण एवं वैशाली जिलों में संचालित बाढ़ सुरक्षात्मक कार्यों का स्थल निरीक्षण किया गया। उन्होंने सारण जिले के सोनपुर प्रखंड अंतर्गत सबलपुर पछियारी टोला में गंगा नदी के तट पर संचालित कटाव निरोधक कार्यों का निरीक्षण किया गया व बोल्डर एप्रोन का कार्य हर हाल में 10 दिनों के भीतर पूरा करने तथा स्लोप में बोल्डर पिचिंग सहित अन्य सभी कार्य हर हाल में इस माह में पूरा करने का निर्देश दिया।

बाढ़ वर्ष 2025 के दौरान कुछ स्थल अतिआक्राम्य श्रेणी में रहे थे

इसके उपरांत सचिव महोदय द्वारा वैशाली जिले के सहदेई बुजुर्ग प्रखंड अंतर्गत गनियारी ग्राम में संचालित कटाव निरोधक कार्यों के निरीक्षण में पाया गया कि गनियारी गांव एवं एनएच-122B की सुरक्षा हेतु चल रहे बोल्डर एप्रोन, स्लोप पिचिंग का कार्य अंतिम चरण में है, जिसे एक सप्ताह में पूरा कर लिया जाएगा। बाढ़ वर्ष 2025 के दौरान कुछ स्थल अतिआक्राम्य श्रेणी में रहे थे। इनमें गंडक नदी के किनारे सारण जिले के मकेर प्रखंड का हैजलपुर ग्राम, गंगा नदी के किनारे भागलपुर जिले के नवगछिया स्थित इस्माइलपुर-बिंदटोली तटबंध, वैशाली जिले के सहदेई बुजुर्ग प्रखंड का गनियारी ग्राम, सारण जिले के सोनपुर प्रखंड का सबलपुर पछियारी टोला व भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड का जवईनियां ग्राम बाढ़ एवं कटाव से अत्यधिक प्रभावित रहा। इनमें हैजलपुर ग्राम के सुरक्षार्थ कटाव निरोधक कार्य पूर्ण कर लिया गया है, जबकि शेष स्थलों का कार्य इस माह के अंत तक पूर्ण करा लिया जाएगा।

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सचिव द्वारा हाल में भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड स्थित जवईनियां ग्राम व भागलपुर जिले के इस्माइलपुर-बिंदटोली तटबंध पर संचालित कार्यों का भी स्थल निरीक्षण किया गया

इसी क्रम में सचिव द्वारा हाल में भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड स्थित जवईनियां ग्राम व भागलपुर जिले के इस्माइलपुर-बिंदटोली तटबंध पर संचालित कार्यों का भी स्थल निरीक्षण किया गया था। सभी निरीक्षणों के दौरान कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग एवं समयबद्ध निष्पादन पर विशेष बल दिया गया। बाढ़ से सुरक्षा के उद्देश्य से जल संसाधन विभाग द्वारा प्रत्येक आगामी बाढ़ अवधि के पूर्व संवेदनशील स्थलों के सुरक्षार्थ कटाव निरोधक/बाढ़ सुरक्षात्मक कार्यों का कार्यान्वयन समयबद्ध रूप से कराया जाता है। इसी क्रम में बाढ़ अवधि 2026 के पूर्व गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला बलान, कोशी, महानंदा, गंगा आदि नदी बेसिनों में 381 स्थलों पर कुल 1115.08 करोड़ रुपए की लागत से कटाव निरोधक कार्य का कार्यान्वयन कराया गया है।

बिहार के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 73.06 प्रतिशत हिस्सा यानी 68.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र बाढ़ प्रवण है

बिहार के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल (94.16 लाख हेक्टेयर) का 73.06 प्रतिशत हिस्सा यानी 68.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र बाढ़ प्रवण है। राज्य के 38 जिलों में से 29 जिले बाढ़ प्रवण की श्रेणी में आते हैं। बिहार में बाढ़ की समस्या का मुख्य कारण अंतर्राष्ट्रीय एवं अंतर्राज्यीय सीमाओं से राज्य में प्रवेश करने वाली नदियां हैं। ऐसे में जल संसाधन विभाग द्वारा प्रत्येक वर्ष बाढ़ अवधि से पूर्व संवेदनशील स्थलों पर समयबद्ध रूप से कटाव निरोधक एवं बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य कराकर तटबंधों एवं जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।

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