गांव से स्कूल और बाजार की दूरी होगी कम
बाघमारा (धनबाद) : दशरथ मांझी की कहानी आप लोगों ने जरूर सुने होंगे, जो अपनी पत्नी की पीड़ा को देखकर पहाड़ का सीना चीर कर रास्ता बनाया, ताकि किसी लोगों को इस तरह की परेशानी ना हो. वहीं धनबाद के बाघमारा प्रखंड के धर्माबांध में भी दशरथ मांझी से प्रेरणा लेकर गांव के लोगों ने श्रमदान कर पहाड़ का सीना चीर कर रास्ता बना रहे हैं ताकि अपने गांव के बच्चे को स्कूल जाने में लम्बा रास्ता तय नहीं करना पड़े.

सौ फीट पहाड़ काट कर बना रहे रास्ता
बाघमारा प्रखंड के धर्माबांध पंचायत अंतर्गत नीचे 2500 की आबादी वाला देवघारा गांव के ग्रामीणों ने महुदा और कतरास की दूरी को काम करने के लिए एक सौ फीट पहाड़ का सीना चीर कर रास्ता बना रहे हैं. जिससे महुदा और कतरास की दूरी कम होगी. ग्रामीण खुद से हाथ में फावड़ा, कुदाल, गेता लेकर गांव के ही महिला, पुरुष पहाड़ को काट कर रास्ता बना रहे हैं. फिलहाल देवघारा गांव के ग्रामीण छह किलोमीटर दूरी तय कर महुदा जाते हैं. रास्ता बन जाने के बाद इसकी दूरी सिर्फ दो किलोमीटर हो जाएगी. जिससे ना केवल बच्चों को स्कूल जाने में आसानी होगी बल्कि ग्रामीणों का हर काम आसान हो जाएगा.

दशरथ मांझी: 12 दिनों से कर रहे सड़क निर्माण
ग्रामीणों ने बताया कि देवघारा गांव के लोग श्रमदान से सड़क बनाने में लगे हुए हैं. गांव के सभी महिला और पुरुष मिलकर 12 दिनों से पर्वत चीर कर सड़क निर्माण कर रहे हैं. ये सड़क एक महीने के अंदर में बनकर तैयार हो जाएगा. इस रास्ते के बन जाने के बाद गांव के लोग आसानी से 2 किमी का सफर तय कर महुदा बाजार जा सकेंगे.

फिलहाल देवघारा गांव के लोगों के पास मात्र रेलवे ट्रैक ही एक उपाय है. जिससे रेल ट्रैक पर आए दिन दुर्घटना हो रही है, जिसके वजह से मजबूरी में रेलवे ट्रैक पर चलकर 7 किमी की दूरी तय कर महुदा के बाजार पहुंचते हैं. बता दें कि ये गांव चारों तरफ जंगलों से घिरा हुआ है.
रिपोर्ट : सूरजदेव मांझी


















