वामन जयंती – कल, पूजन से मिटेगा अहंकार का भाव

डिजीटल डेस्क : वामन जयंती – कल, पूजन से मिटेगा अहंकार का भाव। हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा का खास महत्व है। पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु ने वामन देव का अवतार लिया था। इसलिए इस दिन को वामन जयंती के रूप में मानाया जाता है।

इस बार रविवार 15 सितंबर को यह जयंती मनाई जा रही है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य के अंदर से अहंकार की भावना खत्म हो जाती है। साथ ही पूजन करने वाले के आत्मबल में वृद्धि होती है और हर क्षेत्र में सफलता मिलती है।

भगवान के वामन अवतार के बारे में जानें….

वामन देव भगवान विष्णु के पांचवें और त्रेता युग के पहले अवतार थे। भगवान विष्णु का मनुष्य रूप में पहला अवतार वामन देव ही था। इससे पहले विष्णु जी ने 4 अवतार पशु रूप में लिए थे जिसमें से मत्स्य अवतार, कूर्म अवतार, वराह अवतार और नरसिंह अवतार थे।

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भगवान वामन देव का अवतार हुआ था। इसलिए इस तिथि पर भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा की जाती है।

जानिए इस बार के वामन जयंती के पूजन का शुभ मुहूर्त और विधि…

हिंदू वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्र पाद महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि का शुरुआत 14 सितंबर को रात 8 बजकर 41 मिनट पर हो रही है और तिथि का समापन 15 सितंबर 2024 को शाम 6 बजकर 12 मिनट पर होगा।

ऐसे में, उदयतिथि के अनुसार, वामन जयंती 15 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन पूजा का शुभ अभिजित मुहूर्त सुबह 11बजकर 40 मिनट से 12 बजकर 25 मिनट तक रहेगा।

वामन जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर शुद्ध स्नान के बाद पूजा का संकल्प लेना चाहिए। इस दिन का उपवास में सिर्फ एक समय ही भोजन कर सकते हैं। इसके बाद वामन अवतार की मूर्ति या तस्वीर लें और उसके सामने व्रत का संकल्प लें।

भगवान वामन को पंचामृत से स्नान कराने के बाद उन्हें रोली, मौली, तुलसी, पीले फूल, नैवेद्य अर्पित करें। फिर वामन देव को दही और मिश्री का भोग अवश्य लगाएं। दही में थोड़ा केसर जरूर मिला लें।

भगवान वामन
भगवान वामन

जानिए भगवान वामन की जयंती के पूजन के मंत्र और पूजन का महत्व

पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप और श्रवण करें। इसके बाद भगवान वामन के जन्म की कथा का सुनें। वामन जयंती के लिए पूजा मंत्र इस प्रकार है – देवेश्वराय देवश्य, देव संभूति कारिणे। प्रभावे सर्व देवानां वामनाय नमो नमः।।

इसी क्रम में वामन जयंती अर्ध्य मंत्र इस प्रकार है – नमस्ते पदमनाभाय नमस्ते जलः शायिने, तुभ्यमर्च्य प्रयच्छामि वाल यामन अप्रिणे।। नमः शांग धनुर्याण पाठ्ये वामनाय च। यज्ञभुव फलदा त्रेच वामनाय नमो नमः।।

वामन जयंती को लेकर मान्यता है कि वामन द्वादशी के दिन भगवान के वामन रूप की पूजा करने से बुरे कर्मों से छुटकारा मिल सकता है। साथ ही यह भी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से साधक को बल, बुद्धि, विद्या और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता होता है।

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