दोपहर 2 बजे मीडिया से बात करेंगे उपेंद्र कुशवाहा
PATNA : उपेंद्र कुशवाहा जदयू में नीतीश कुमार के साथ अभी बने रहकर बगावत का झंडा बुलंद रखेंगे या फिर नई राह लेंगे ? बिहार के सियासी हलकों में इस वक्त सभी के जेहन में ये सवाल तैर रहा है. सभी की नजरें दोपहर 2 बजे के प्रेस कांफ्रेंस पर टिकीं हैं जब उपेंद्र कुशवाहा मीडिया से रू-ब-रू होंगे.

उपेंद्र कुशवाहा के साथ बैठक में पहले दिन 54 वक्ताओं ने रखे अपने विचार
सिन्हा लाइब्रेरी के कक्ष में कुशवाहा जेडीयू के उन कार्यकर्ताओं के साथ विचार विमर्श कर रहे हैं जो नीतीश कुमार की मौजूदा नीतियों से सहमत नहीं हैं. खासकर जिस तरह से नीतीश कुमार ने 2025 में तेजस्वी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने का एलान किया है उससे पार्टी कार्यकर्ताओं का एक गुट नाराज दिख रहा है. रविवार के बाद आज भी विचार-विमर्श जारी रहेगा. दो दिनों तक चलने वाले इस विमर्श में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा शामिल नहीं हुए परन्तु चार प्रदेश उपाध्यक्ष मौजूद रहे. एमएलसी रामेश्वर महतो भी बैठक में शामिल हुए. पहले दिन कुल 54 वक्ताओं ने अपने विचार रखे.
‘नीतीश कुमार को बिहार की राजनीति से भगाने की हो रही कोशिश’
बैठक का एजेंडा पहले से तय था – कैसे पार्टी को बिखरने से बचा कर मजबूत किया जाए. मंच पर लगे पोस्टर में नीतीश कुमार के साथ जॉर्ज फर्नांडिस, शरद यादव के साथ उपेंद्र कुशवाहा की तस्वीर तो लगी थी लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह की फोटो गायब थी.
वक्ताओं ने नीतीश कुमार की खूब तारीफ की , उनके नेतृत्व को भी किसी ने चुनौती नहीं दी परन्तु उनके फैसलों पर खूब सवाल उठे. बैठक में मौजूद नेताओं ने साफ कर दिया कि उन्हे तेजस्वी यादव का नेतृत्व बिल्कुल भी मंजूर नहीं है. सवाल नीतीश कुमार की राजद के साथ डील को लेकर उठे.
इसके लिए नीतीश कुमार के फैसले पर सवाल उठाते
हुए वक्ताओं ने कहा कि वो स्वविवेक से फैसले नहीं ले रहे. वक्ताओं ने पूरे मामले को लेकर उपेंद्र कुशवाहा के स्टैंड पर ही अपनी मुहर लगाई.
नीतीश कुमार पर कॉकस के दबाव में फैसला लेने का आरोप
कुशवाहा पहले से ही नीतीश कुमार पर कॉकस के
दवाब में फैसले लेने का आरोप लगा रहे हैं.
उन्होने कहा कि ये कॉकस पार्टी को कमजोर कर रहा है
और नीतीश कुमार को बिहार की राजनीति से भगाने की कोशिश कर रहा है.
पार्टी के 4 प्रदेश उपाध्यक्ष हुए बैठक में शामिल
उपेंद्र कुशवाहा की बैठक में राज्य भर से कार्यकर्ता और नेता पहुंचे.
आलम ये था कि सिन्हा लाइब्रेरी का कक्ष छोटा पड़ गया. कई नेताओं
को बैठने की जगह नहीं मिल पाई और कई नेताओं को कक्ष से बाहर ही रहना पड़ा.
हालांकि ऐसी भी खबरें आई थी कि जदयू की तरफ से इस बात को लेकर
काफी कोशिश की गई थी कि उपेंद्र कुशवाहा की बैठक सफल न हो पाए.
इसमें शामिल होने वाले नेताओं पर पार्टी की ओर से कार्रवाई के
भी संकेत दिए गए. लेकिन इसके बावजूद अच्छी तादाद में पार्टी नेता बैठक में पहुंचे.
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