डिजीटल डेस्क : U-Turn of King Maker in Haryana – दुष्यंत चौटाला इस समय Haryana की सियासत में वह चेहरा हैं जिसके हर बोल और हर चाल पर सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष टकटकी लगाए हुए है। चार साल पहले Haryana में भाजपा को सरकार बनाने में मदद कर भाजपा के लिए मसीहा बने दुष्यंत चौटाला उपमुख्यमंत्री के रुतबे से नवाजे गए थे लेकिन अब मौजूदा हालात में वह भाजपा को सत्ता से हटाने में आखिरी कील ठोंकने का मन बना चुके हैं। बुधवार को दुष्यंत चौटाला ने खुलकर कहा कि Haryana में मौजूदा भाजपा सरकार को गिराने में वह मदद करेंगे।

Haryana में भाजपा सरकार गिराने में बाहर से मदद करेंगे दुष्यंत
Haryana में लोकसभा चुनाव से पहले ही प्रदेश के राजनीतिक समीकरण बदलने लगे हैं। तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन कांग्रेस को मिलने के बाद सियासी गलियारों में हलचल मची हुई है। पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने बुधवार को कहा कि इस समय भाजपा की सरकार अल्पमत में है। अगर सरकार को गिराया जाए तो हम (जजपा) सरकार गिराने में बाहर से समर्थन करेंगे। प्रदेश की भाजपा सरकार अल्पमत में आ गई है। सीएम नायब सिंह सैनी को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए नहीं तो उन्हें बहुमत पेश करना चाहिए। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि वह इसके लिए राज्यपाल से लिखित में आग्रह करेंगे कि दो विधायक इस्तीफा दे चुके हैं, तीन समर्थन वापस ले चुके हैं। सरकार के पास 5 विधायक कम हो चुके हैं। ऐसे में राज्यपाल सरकार को बहुमत परीक्षा पास करने को कहें।
दुष्यंत चौटाला अपने विधायकों को जारी करेंगे व्हीप
Haryana में पूर्व मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने इसी क्रम में आगे कहा कि नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा को कहना चाहूंगा कि आज के गणित के हिसाब से कदम उठाया जाए तो हम (जजपा) चुनाव के दौरान ही सरकार को गिराने में सहयोग देने पर पूरी तरह से विचार करेंगे। जजपा की टिकट पर चुनकर आए सभी विधायकों को व्हीप के अनुसार वोट देने होंगे। हमने (जजपा ने) तीन विधायकों को नोटिस जारी कर दिया है। अभी तक उनकी की ओर से जवाब नहीं आया है। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि पार्टी विरोधी गतिविधि का रिकॉर्ड हमारे पास है। हमारे पास तीनों विधायकों की वीडियो रिकॉर्डिंग और पोस्टर हैं। बताया जा रहा है कि विधायक जोगीराम सिहाग, रामनिवास सुरजाखेड़ा तथा देवेंद्र बबली को नोटिस जारी किए गए हैं। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि लोकसभा चुनाव की वोटिंग से पहले हम तीनों विधायकों पर कार्रवाई कर देंगे। नियम के अनुसार पहले विधायक को नोटिस जारी कर जवाब लेना होता है।

भाजपा से गच्चा मिलने पर निर्दलियों ने सत्ता को संकट में डाला
Haryana में लोकसभा चुनाव से 19 दिन पहले मंगलवार को एक बड़े नाटकीय घटनाक्रम में तीन निर्दलीय विधायकों ने भाजपा सरकार से समर्थन वापस ले लिया जिनमें चरखी दादरी से विधायक सोमबीर सांगवान, पुंडरी से विधायक रणधीर गोलन और नीलोखेड़ी से विधायक धर्मपाल गोंदर शामिल हैं। वे कांग्रेस के साथ आ गए हैं और भाजपा की नायब सैनी सरकार संकट में। भाजपा से नाराज तीनों निर्दलीय विधायकों के सरकार से समर्थन वापसी के पीछे विधानसभा चुनाव की टिकट है। तीनों ही विधायकों को इस बात का आभास हो गया था कि सरकार को समर्थन देने के बावूजद भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में उनको टिकट नहीं देगी। इसलिए विधानसभा चुनाव में अपनी टिकट पक्की करने के लिए तीनों ने सरकार से बागी होते हुए कांग्रेस में अपनी टिकट पक्की करने की कोशिश की है। साढ़े चार साल पहले जब मनोहर लाल के नेतृत्व में भाजपा-जजपा की सरकार बनी तो निर्दलीय विधायक रणजीत सिंह को मंत्री बनाया गया था, जबकि शेष 5 को अलग-अलग विभागों में चेयरमैन नियुक्त किया गया था। समय पूरा होने के बाद किसी निर्दलीय विधायक को सरकार ने दोबारा एडजस्ट नहीं किया। जजपा से गठबंधन टूटने के बाद निर्दलियों को आस जगी थी कि उनको मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी, लेकिन भाजपा उनको गच्चा दे गई और निर्दलीय देखते रह गए। उस समय भाजपा ने निर्दलिय विधायकों को विधानसभा की टिकटों में एडजस्ट करने की बात कही थी, लेकिन धीरे-धीरे विधायकों को लगने लगा था कि भाजपा में उन्हें टिकट मिलना मुश्किल है। उसके पीछे वजह यह कि चरखी दादरी से पूर्व विधायक सतपाल सांगवान जजपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं और सोमबीर सांगवान के सामने यह चुनौती बनकर आए हैं। इसी तरह धर्मपाल गोंदर को भाजपा की टिकट इसलिए मुश्किल है, क्योंकि वहां से भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे और पूर्व विधायक भगवानदास कबीरपंथी दावेदार और मनोहर लाल के भरोसेमंद हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति पूंडरी से विधायक रणधीर गोलन की है। वहां पर भाजपा के महामंत्री रहे एडवोकेट वेदपाल की दोबारा से नजर है। इसके अलावा दो माह पहले पूर्व विधायक दिनेश कौशिक की मनोहर लाल की अगुवाई में भाजपा ज्वाइनिंग ने गोलन की धड़कनें बढ़ा दी थीं।


















