ज्यादा धुआं छोड़ने वाली बाइक और स्कूटर की पावर घट सकती है। सरकार और वाहन उद्योग Force Repair सिस्टम पर काम कर रहे हैं, जिसमें Limp Home Mode लागू होगा।
Vehicle Pollution Rule नई दिल्ली: अगर आपकी बाइक या स्कूटर तय सीमा से ज्यादा धुआं छोड़ता है, तो आने वाले समय में वाहन की रफ्तार और इंजन की ताकत अपने आप कम हो सकती है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और वाहन उद्योग प्रदूषण बढ़ाने वाली खराबी को लेकर एक ऐसे Force Repair सिस्टम पर काम कर रहे हैं, जिसके तहत वाहन में उत्सर्जन संबंधी गंभीर समस्या आने पर उसे सर्विस कराने के लिए मजबूर किया जा सकेगा।
Vehicle Pollution Rule: Emission Limit पार होते ही घट जाएगी पावर
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत यदि किसी बाइक या स्कूटर में ऐसी खराबी आती है, जिससे उसका उत्सर्जन निर्धारित सीमा से अधिक हो जाता है, तो सिस्टम सक्रिय हो सकता है। इसके बाद वाहन को सामान्य तरीके से चलने की पूरी शक्ति नहीं मिलेगी।
वाहन को Limp Home Mode में डालने की योजना है। इस मोड में इंजन की पावर और वाहन की गति सीमित कर दी जाएगी, ताकि चालक वाहन को धीरे-धीरे नजदीकी सर्विस सेंटर या वर्कशॉप तक ले जा सके।
Key Highlights
ज्यादा प्रदूषण करने वाले बाइक और स्कूटर पर नई तकनीकी व्यवस्था लागू हो सकती है।
उत्सर्जन सीमा पार होने पर वाहन की Power अपने आप सीमित हो सकती है।
वाहन को Limp Home Mode में डालने की योजना है।
वाहन मालिक को सर्विस सेंटर जाकर खराबी ठीक करानी पड़ सकती है।
सड़क परिवहन मंत्रालय और वाहन उद्योग Force Repair सिस्टम पर काम कर रहे हैं।
Vehicle Pollution Rule: Pollution बढ़ाने वाली खराबी पर होगा Action
इस व्यवस्था का उद्देश्य वाहन मालिकों को प्रदूषण बढ़ाने वाली खराबी को लंबे समय तक नजरअंदाज करने से रोकना है। फिलहाल किसी वाहन में उत्सर्जन संबंधी खराबी आने के बाद चालक उसे सामान्य तरीके से चलाता रह सकता है, जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ सकता है।
Force Repair सिस्टम लागू होने पर वाहन में मौजूद तकनीकी सिस्टम उत्सर्जन सीमा पार होने की स्थिति को पहचानकर वाहन की क्षमता सीमित कर सकता है। इससे वाहन मालिक को खराबी की मरम्मत कराना जरूरी हो जाएगा।
Vehicle Pollution Rule: सर्विस सेंटर तक पहुंचने की मिलेगी क्षमता
Limp Home Mode का उद्देश्य वाहन को पूरी तरह बंद करना नहीं, बल्कि उसकी क्षमता को इतना सीमित करना होगा कि वह सर्विस सेंटर या वर्कशॉप तक पहुंच सके। यानी वाहन में इतनी पावर उपलब्ध रहेगी कि चालक उसे सुरक्षित तरीके से मरम्मत के लिए ले जा सके।
सड़क परिवहन मंत्रालय और वाहन उद्योग की ओर से इस तरह की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। इसका अंतिम स्वरूप और इसे लागू करने से जुड़े नियम तय होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।


















