कोडरमा: भारी बारिश के बाद तिलैया डैम के 8 फाटक खोले गए, बराकर नदी के किनारे बसे गांवों को अलर्ट

कोडरमा:  झारखंड में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण तिलैया डैम का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। देर रात शुक्रवार को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए डैम प्रबंधन ने तिलैया डैम के आठ फाटक खोल दिए। फाटक खुलते ही बराकर नदी की धार तेज हो गई, जिसके चलते नदी किनारे बसे इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है।

तिलैया डैम से पानी छोड़े जाने के बाद कोडरमा जिला प्रशासन ने हजारीबाग, गिरिडीह, जामताड़ा और धनबाद जिले के प्रशासन को अलर्ट भेजा है। दरअसल, बराकर नदी इन सभी जिलों से होकर गुजरती है और डैम से छोड़ा गया पानी सीधे इन क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है।

तिलैया डैम के 8 फाटक खोले गए – प्रभावित गांवों को सतर्क रहने की अपील

प्रशासन ने खासकर बरी प्रखंड के तिलैया बस्ती, चंदा बीघा, बेला, नवाडी, करगयो, कुलवा, जय नगर प्रखंड के कांत बड़ा, उसे सहन, सुधा संग, कमाई, करियावा, धरीदी बीघा, मूर्तिया सहित कई गांवों के लोगों को सचेत रहने को कहा है। ग्रामीणों को हिदायत दी गई है कि वे नदी के किनारे या उसके आसपास न जाएं और अपने बच्चों तथा मवेशियों को भी नदी से दूर रखें।

तिलैया डैम के 8 फाटक खोले गए – प्रबंधन की आधिकारिक सूचना

डीबीसी डैम प्रबंधन ने सूचना जारी कर बताया कि शुक्रवार 22 अगस्त की रात 9 बजे ऊपरी गेट खोला गया। गेट खुलने के साथ ही नदी की जलधारा और तेज हो गई है। इस कारण नदी किनारे किसी भी प्रकार की गतिविधि करना खतरनाक हो सकता है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बराकर नदी का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

प्रशासन ने शुरू की निगरानी

डैम से पानी छोड़े जाने के बाद प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। संबंधित जिलों के आपदा प्रबंधन दल को सतर्क रहने को कहा गया है। राजस्व कर्मियों के साथ-साथ पुलिस-प्रशासन की टीमें भी अलर्ट मोड पर हैं। ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए माइकिंग और अन्य माध्यमों का सहारा लिया जा रहा है ताकि समय रहते लोग सुरक्षित स्थान पर जा सकें।

बराकर नदी से जुड़ी अहम जानकारी

तिलैया डैम बराकर नदी पर बना है और यह झारखंड का पहला बांध है, जिसे स्वतंत्रता के बाद 1953 में बनाया गया था। यह डैम कोडरमा के साथ-साथ आसपास के जिलों में सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए भी अहम माना जाता है। भारी बारिश की स्थिति में डैम से पानी छोड़ना मजबूरी होती है, ताकि बांध पर दबाव न बढ़े और वह सुरक्षित रह सके।

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