रांचीः साल 2024 की पहली झारखंड कैबिनेट मीटिंग से सरकार ने एक निर्णय लिया..ये निर्णय केंद्रीय जांच एजेंसियों को लेकर है..जिसमें साफ कहा गया है कि..अगर राज्य के अधिकारियों को ईडी-सीबीआई या फिर आईटी की तरफ से समन आता है तो सबसे पहले समन पाने वाले अधिकारियों को राज्य सरकार को सूचना देनी होगी।
माना ये जा रहा है अपने अधिकारियों को राज्य के बाहरी जांच एसेंजियों से बचाने के लिए हेमंत सोरेन की सरकार ने नई जुगत भिड़ाई है..सरकार के इस निर्णय के बाद सवाल उठने लगे हैं कि ईडी की ओर से सरकार के जिन अधिकारियों को अबतक नोटिस या समन मिला है, वो अब क्या करेंगे।
जैसे मुख्यमंत्री के प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद उर्फ पिंटू, साहिबगंज के डीसी समेत अधिकारी ऐसे हैं जो ईडी-सीबीआई जैसे कई जांच एजेंसी की रडार पर हैं..वो सरकार के निर्णय के बाद पूछताछ के लिए जाते हैं या नहीं, ये देखना दिलचस्प होगा।
जांच एजेंसियों से अधिकारियों को बचाने की नई जुगत!
ED के सात समन पर एक तरफ सीएम हेमंत सोरेन ईडी कार्यालय पूछताछ के लिए पहुंच नहीं रहे हैं…मुसीबतों की तलवार खुद उनपर लटक रही है..लेकिन अपने अधिकारियों को ऐसे जांच ऐसेंजियों से बचाने के लिए हेमंत सोरेन की सरकार ने नई जुगत भिड़ाई है।
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यानि ईडी, सीबीआई, आईटी जैसे जांच एजेंसियों के समन को लेकर हेमंत सरकार ने दिशा-निर्देश जारी किया है..हेमंत सरकार ये दिशा निर्देश ये कहता है कि..राज्य के बाहर की कोई जांच एजेंसी अगर सरकार के पदाधिकारियों को नोटिस या समन भेजती है तो अधिकारियों को तुरंत राज्य सरकार को सूचना देकर परमिशन लेनी होगी।
सरकार के इस फैसले को लेकर विपक्षी दल बीजेपी ने जोरदार हमला बोला है..कैबिनेट के इस निर्णय को लेकर बीजेपी नेताओं ने कहा कि..सरकार ये निर्णय बता रहा है कि…सरकार डरी हुई है।
बाहरी जांच एजेंसियों को लेकर लिए गये निर्णय पर सरकार का तर्क ये…
कैबिनेट की बैठक में जांच एजेसियों को लेकर जो निर्णय लिए गये हैं, उसपर सरकार का ये तर्क है कि…जांच एजेंसियां कभी-कभी ऐसे कागजात मांगती है जो अपूर्ण होते हैं। जांच एजेंसियों को भी इससे परेशानी होती है..नियम ना होने की वजह से इसमें दिक्कतें होती थी..इसलिए सरकार ने ये निर्णय लिया है..यानि समन या नोटिस मिलने पर कानूनी सलाह लेकर ही अब जवाब दाखिल किया जायेगा।


