‘बांस अब सिर्फ परंपरा नहीं, बिहार में बनेगा आय और रोजगार का साधन’

पटना : बिहार में बांस की खेती करने वाले किसानों और इससे जुड़े कारीगरों की आय बढ़ाने के लिए बुधवार को मीठापुर अवस्थित कृषि भवन में बिहार बांस अर्थव्यवस्था शिखर सम्मेलन 2026 का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन करते हुए कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण, उपकरण और बाजार आदि जरूरतों को पूरा किया जाएगा। बांस से बने उत्पाद किसानों और कारीगरों को अच्छा मूल्य दिलाने की क्षमता रखते हैं। इसलिए इसकी खेती के लिए किसानों को जरूरी सहयोग और प्रोत्साहन दिया जाएगा।

बांस उत्पादन के लिए प्राथमिक जिलों का होगा चयन – कृषि मंत्री रामकृपाल यादव

उन्होंने कहा कि बिहार में पहली बार बांस शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया है, जिसमें विभिन्न राज्यों से सफल किसान, सहकारी संस्थाएं और कारीगर संस्थान शामिल हुए हैं। इन सफल मॉडलों को समझकर आने वाले समय में राज्य में बांस की खेती का विकास किया जाएगा। इस सम्मेलन के माध्यम से बांस उत्पादन के लिए प्राथमिक जिलों का चयन किया जाएगा और वहां नर्सरी, प्रसंस्करण और मार्केटिंग की पूरी व्यवस्था की जाएगी। बिहार अब कच्चा माल देने वाला राज्य नहीं रहेगा, यहां से बांस की बनी वस्तुएं जैसे सोफा, खिलौने, घरेलू जरूरत की चीजें आदि को निर्यात किया जाएगा।

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खेत की मेढ़ पर बांस से किसानों को अतिरिक्त आमदनी – रामकृपाल यादव

इस मौके पर कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने कहा कि बांस हमारी संस्कृति का हिस्सा है। जन्म से लेकर मृत्यु तक यह किसी न किसी रूप में हमारे साथ रहता है। बांस से खिलौने, सोफा, चारपाई, घर, खाने का अचार आदि बनते रहे हैं, लेकिन हाल के दिनों में इसके प्रयोग में गिरावट आई है। इसे आज के हिसाब से कैसे विकसित किया जाए, इसके लिए कृषि विभाग प्रयास करेगा।

प्रशिक्षण, नर्सरी और मार्केटिंग की बनेगी व्यवस्था – कृषि मंत्री

नई दिल्ली से आए आईसीएआर के उपनिदेशक डॉ. संजय कुमार सिंह ने कहा कि बांस किसानों के लिए एटीएम की तरह काम करता है। इसे खेत के मेढ़ पर उगाकर किसान अच्छी आमदनी कर सकते हैं। इस दौरान केरल से आए केएफआरआई के श्रीकुमार बी. बी., उद्यान निदेशक अभिषेक कुमार ने भी अपने विचार रखे। इस सम्मेलन में राज्य भर से आए बांस के शिल्प उत्पादों की एक प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें बांस से बने फर्नीचर, सोफा, फूलदान, कलम स्टैंड, घरेलू इस्तेमाल के डिब्बे, डलिया, सजावटी चीजें आकर्षण का केंद्र बनी हुई थीं।

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