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झारखंड में इंडिया गठबंधन से कौन होगा राज्यसभा का उम्मीदवार ?

झारखंड में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के साथ राज्यसभा के चुनाव को लेकर भी हलचल बढ़ गई है .झारखंड में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 11 मार्च है और अब तक किसी भी पार्टी के तरफ से उम्मीदवार की घोषणा नहीं की गई है.

इस बार झारखंड के लिए राज्यसभा की 2 सीट खाली हो रही हैं जिसमें कांग्रेस से राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू और भाजपा राज्यसभा सांसद समीर उरांव का कार्यकाल 3 मई को खत्म हो रहा है.

लेकिन अब झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर इंडिया गठबंधन में फूट के आसार बन रहे हैं. राज्यसभा में कांग्रेस की तरफ से धीरज प्रसाद साहू की सीट खाली हो रही है. औऱ इस सीट को लेकर सियासत गर्म होती जा रही है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक धीरज साहू के सीट पर इस बार झामुमो अपना उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है वहीं कांग्रेस का कहना है कि सीट कांग्रेस की खाली हो रही है तो इस सीट पर कांग्रेस का हक बनता है.

पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी से पहले बीते 31 दिसंबर को गांडेय विधानसभा सीट से विधायक सरफराज अहमद ने अपना इस्तीफा दे दिया था. तब चर्चा तेज थी कि सरफराज अहमद को झामुमो राज्यसभा भेजने वाली है. अब सरफराज अहमद भी बार-बार यह दावा कर रहे हैं  कि वो राज्यसभा के लिए नामांकन करेंगे.

राज्यसभा सीट को लेकर इंडिया गठबंधन की पार्टियों के बीच तालमेल बैठता नहीं दिख रहा है.

वर्तमान में झारखंड से राज्यसभा की 6 सीट हैं. इन 6 सीटों पर भाजपा की तरफ से आदित्य साहू, समीर उरांव और दीपक प्रकाश झामुमो की ओर से महुआ माजी और शिबू सोरेन और कांग्रेस की तरफ से धीरज प्रसाद साहू हैं.

धीरज प्रसाद साहू साल 2010 से ही राज्यसभा में कांग्रेस से झारखंड का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. और कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर यह सीट कांग्रेस को मिलती है तो कांग्रेस एक बार फिर धीरज साहू को राज्यसभा भेज सकती है.

बीते कुछ समय से धीरज साहू ईडी रेड को लेकर चर्चा में रहे थे. ईडी ने उनके आवास से 300 करोड़ से अधिक कैश बरामद किए थे जिसके बाद उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे थे .

हालांकि अब तक इस सीट को लेकर अब तक संशय बरकरार है. इसी सीट को लेकर झामुमो भी सरफराज अहमद को राज्यसभा भेजने की तैयारी कर रही है.

वहीं भाजपा के तरफ से भी प्रत्याशी को लेकर दुविधा की स्थिति है. भाजपा की तरफ से इस सीट पर कयास लगाए जा रहे थे कि समीर उरांव को भाजपा एक बार फिर से मौका दे सकती है लेकिन भाजपा ने समीर उरांव को लोहरदगा सीट से लोकसभा का टिकट दे दिया है जिसके बाद से अब भाजपा की तरफ से राज्यसभा के लिए आशा लकड़ा का नाम सामने आ रहा है. लेकिन भाजपा ने भी अब तक इसकी आधिकरिक तौर पर पुष्टि नहीं की है.

अब इन दोनों सीटों पर पार्टियां किसे अपना उम्मीदवार घोषित करती है ये तो आने वाले समय में ही पता चल पाएगा.

क्या आपको पता है राज्यसभा का इतिहास क्या है, और इसके लिए चुनाव आखिर होते कैसे हैं. तो चलिए हम आपको बताते हैं कि राज्यसभा की शुरुआत कब से हुई.

राज्यसभा के इतिहास की बात करें तो भारत की आजादी के बाद 3 अप्रैल 1952 को राज्यसभा का गठन किया गया. हालांकि जानकार ये भी बताते हैं कि राज्यसभा का इतिहास भारत में ब्रिटिश काल से ही था और इसका नाम काउंसिल ऑफ स्टेट था ,1954 में इसका नाम बदलकर राज्यसभा किया गया.

बता दें राज्यसभा लोकसभा के जैसे कभी भंग नहीं होती. राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है. राज्यसभा के एक तिहाई सदस्यों का कार्यकाल हर दो साल में खत्म हो जाता है इसलिए हर दो साल में राज्यसभा के चुनाव होते हैं.

राज्यसभा में कुल सदस्यों की बात करें तो राज्यसभा में कुल 250 सदस्य होते हैं. इनमें से 238 सदस्य विधायकों के द्वारा चुने जाते हैं, जबकि शेष 12 सदस्यों को राष्ट्रपति के द्वारा मनोनीत किया जाता है. राष्ट्रपति जिन 12 सदस्यों को मनोनीत करते हैं वो खेल, साहित्य, कला, व्यापार सहित अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले होते हैं.

वहीं सभी राज्यों से राज्यसभा पहुंचने वाले सदस्यों की संख्या अलग होती है. किसी भी राज्य के आबादी के अनुसार राज्यसभा के सदस्य की संख्या तय होती है. जितनी ज्यादा आबादी उतने ज्यादा सदस्यों की संख्या.

राज्यसभा चुनाव की वोटिंग में देश की जनता वोट नहीं करती है बल्कि इसका चयन विधायकों के वोट से होता है. किसी भी राज्य की विधानसभा में राज्यसभा सदस्य के लिए चुनाव होते हैं और संबंधित राज्य के विधायक ही उन्हें वोट करते हैं.

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अब जानते हैं आखिर कैसे होता है राज्यसभा का चुनाव ?

राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव एक फॉर्मूले के आधार पर होता है. फॉर्मूला ये है कि किसी राज्य में कितनी राज्यसभा सीटें खाली हैं, उसमें 1 जोड़ा जाता है, फिर उसे कुल विधानसभा सीटों की संख्या से भाग दिया जाता है. इससे जो संख्या आती है उसमें फिर 1 जोड़ दिया जाता है.

अगर हम झारखंड के संदर्भ में इसे समझे तो झारखंड में 2 राज्यसभा की सींटें खाली हो रही है.उसमें 1 जोड़ देंगे तो वह 3 हो जाती है.

कुल विधानसभा सीटों की संख्या 81 है, अब 81 को 3 से भाग दे देंगे जिससे 27 प्राप्त होगा.

यानी झारखंड में किसी भी सदस्य को चुनाव में जीत हासिल करने के लिए 27 विधायकों का मत प्राप्त करना जरुरी होता है.

अब झारखंड में अगर इंडिया गठबंधन के बीच उम्मीदवार के नाम को लेकर सुलह हो जाती है तो उम्मीदवार को बहुमत प्राप्त हो जाएगा लेकिन अगर झामुमो और कांग्रेस के बीच बात नहीं बनती है तो कांग्रेस के लिए मुशिकलें खड़ी हो सकती है. झारखंड  में वर्तमान में झामुमो के 29 विधायक हैं तो झामुमो के प्रत्याशी को बहुमत प्राप्त हो सकता है लेकिन कांग्रेस के पास झारखंड में सिर्फ 17 विधायक हैं, ऐसे में अगर इंडिया गठबंधन में बात नहीं बनती तो कांग्रेस के उम्मीदवार को बहुमत प्राप्त करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

लेकिन अब यह तो आने वाले समय में ही पता चल पाएगा कि झारखंड में इंडिया गठबंधन किसे अपना उम्मीदवार घोषित करती है और कौन राज्यसभा पहुंच पाता है.

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