‘राजनीतिक हिस्सेदारी के लिए बनिये भी हुए एकजुट’

गया : लोकसभा चुनाव की सरगर्मी शुरू होते ही विभिन्न समाजों के नेताओं को जिसकी जितनी भागीदारी उसकी उतनी हिस्सेदारी की याद सताने लगी है। वे सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों पर खुलकर आरोप लगा रहे हैं कि उनके समाज को राजनीतिक भागीदारी नहीं दी जा रही है। इससे समाज के लोगों में खासा रोष है। ताजा मामला वैश्य समाज से जुड़ा है। शहर के वैश्य समाज के नेता जो विभिन्न राजनीतिक दलों में है वे एकजुट हुए और प्रेसवार्ता की। प्रेसवार्ता के बहाने वैश्य समाज के लोगों ने राजनीतिक दलों से मांग की उन्हें भी राजनीतिक हिस्सेदारी दी जाए। मसलन उन्हें भी लोकसभा और विधानसभा में चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया जाए।

तैलिक महासभा के जिला अध्यक्ष संजय साव ने कहा कि पूरे बिहार में वैश्यों की आबादी 22 प्रतिशत है। इस हिसाब से बनिये के बेटों को भी टिकट दिया जाना चाहिए था। लेकिन सभी राजनीतिक दल बनियों को बंधुआ मजदूर समझ लिया है। यही वजह है कि वे वैश्य समाज का सिर्फ इस्तेमाल करते हैं पर राजनीतिक हिस्सेदारी की बात आती है तो वे हमें दरकिनार कर देते हैं। उन्होंने कहा कि अब यह नहीं चलने वाला है। वैश्य समाज के सभी लोग बहुत हद तक जागरूक हो गए हैं।

उन्होंने बताया कि वैश्य समाज की बड़ी बैठक सात अप्रैल को बोधगया में होने जा रही है। उस बैठक में वैश्य समाज मतदान में भागीदारी लेगा या नहीं। इस मसले पर बड़ा निर्णय लेगा। इस मौके पर वैश्य समाज के विभिन्न उपजातियों के नेताओं ने राजनीतिक हिस्सेदारी के मसले पर अपनी अपनी बातें रखीं। सभी ने राजनीतिक दलों से वैश्यों को टिकट दिए जाने की बातें कहीं और अपना रोष भी जताया।

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आशीष कुमार की रिपोर्ट

Saffrn

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