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शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल, टेबल पर पैर रख नींद फरमाते दिखे प्रधानाध्यापक

औरंगाबाद : औरंगाबाद के शिक्षा विभाग का पोल एक वायरल वीडियो ने खोल कर रख दिया है। क्योंकि अब शिक्षा विभाग के पूर्व अपर मुख्य सचिव केके पाठक की खौफ शिक्षकों के अंदर नहीं रह गया है। केके पाठक के हटने के बाद शिक्षा विभाग का कमान एसके सिद्धार्थ को सौंप दिया गया है। जिसके कारण शिक्षको में अब पाठक का खौफ खत्म होगा है। एक बार फिर से पुनः बिहार की शिक्षा व्यवस्था अपनी पुरानी लय में लौटते नजर आने लगी है।

आपको बता दें कि जिसका जीता जागता उदाहरण यह वारयल वीडियो है। इसमें आप देख सकते हैं कि किस तरह विद्यालय के प्रधानाध्यापक अपने टेबल पर पैर रखकर नींद फरमा रहे हैं। हालांकि यह वायरल वीडियो की पुष्टि हम नहीं करते हैं लेकिन पड़ताल के दौरान जो खुलकर सामने आया है। उसमें बताया जा रहा है कि यह वायरल वीडियो औरंगाबाद जिला के मदनपुर प्रखंड के परसडीह गांव स्थित राजकीय मध्य विद्यालय से जुड़ा हुआ है। जहां के प्रधानाध्यापक जावेद खां अपने ऑफिस में कुर्सी पर बैठकर दोनों पैर को टेबल पर रख पंखे की हवा के साथ खराटेदार नींद लेते नजर आ रहे है। जबकि उनकी दूसरी तस्वीर किसी क्लासरूम की है जहां वह कुर्सी पर बैठकर और एक-दूसरे कुर्सी पर पैर रखकर नींद फरमा रहे है।

जानकारी हो कि सरकारी विद्यालय में शिक्षकों की बहाली बच्चों को गुणवतापूर्ण शिक्षा देने के लिए होती है। लेकिन शिक्षक पढ़ाने के बजाए क्लास रूम के ऑफिस में नींद फरमाते नजर आ रहे है। एक ओर शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव कभी झुगी- झोपड़ियों में तो कभी ट्रेन में चढ़कर छात्र-छात्राओं से पूछताछ कर शिक्षा विभाग को सुधारने में लगे हुए थे। केके पाठक को हट जाने के बाद शिक्षा अपने विभाग के द्वारा जारी निर्देश को खुल्लेआम धज्जियां उड़ा रहे है। इस संबंध में जब प्रधानाध्यापक जावेद खां से टेलीफोनिक माध्यम से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि हम इसपर कुछ नहीं कहेंगे। आप मेरा वीडियो वायरल कीजिए अब हमें कोई दिक्कत नहीं है।

जब इस संबंध में मध्यान भोजन के डीपीओ सह प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी रवि कुमार रौशन से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि वीडियो मिला है जांच की जा रही है। जांच उपरांत दोषी पाए जाने वाले शिक्षक पर कार्रवाई की जाएगी। अब यह देखना लाजमी होगा कि क्या केके पाठक के द्वारा बिहार की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने को लेकर जो लकीरे खींची गई थी वह बरकरार रह पता है, या फिर एक बार बिहार की शिक्षा व्यवस्था वही पुरानी अंदाज में लौट जाती है। अब तो आनेवाला वक्त ही बताएगा।

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यह भी देखें : https://youtube.com/22scope

दीनानाथ मौआर की रिपोर्ट

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