रांची: इस साल दुर्गा पूजा की शुरुआत 3 अक्टूबर से होगी और महाषष्ठी की पूजा 9 अक्टूबर को संपन्न होगी। विशेष बात यह है कि इस बार बेलवरण की पूजा 8 अक्टूबर, मंगलवार को ही हो जाएगी, जबकि महाषष्ठी की तिथि 9 अक्टूबर, बुधवार को है। बेलवरण की पूजा शाम को होती है और 9 अक्टूबर की शाम को सप्तमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी, जिसके कारण मां दुर्गा का आह्वान 8 अक्टूबर को किया जाएगा।
महाषष्ठी के दिन सुबह 9 अक्टूबर को कल्पारंभ पूजा होगी, जबकि आमंत्रण और अधिवास पूजा शाम को आयोजित की जाएगी। महासप्तमी की पूजा 10 अक्टूबर, गुरुवार को होगी। इस बार महाअष्टमी और महानवमी की तिथियां एक ही दिन, 11 अक्टूबर को पड़ रही हैं। महाअष्टमी की पूजा सुबह 5:47 बजे तक होगी और संधि पूजा सुबह 6:24 बजे से प्रारंभ होगी।
महास्नान की विशेषता और आयोजन
इस साल सप्तमी और अष्टमी के दिन मां दुर्गा का महास्नान आयोजित किया जाएगा, परंतु नवमी के दिन यानी 12 अक्टूबर को महास्नान नहीं होगा। महास्नान मां दुर्गा की पूजा से पहले किया जाता है, जिसमें आईने में देख कर मंत्रोच्चार द्वारा मां का स्नान कराया जाता है। इस स्नान में पंचद्रव्य का उपयोग किया जाता है, जिसमें मधु, गुड़, नारियल पानी, और ईख का रस आदि सम्मिलित होते हैं।
महाअष्टमी और नवमी की पूजा एक साथ
महाअष्टमी और नवमी की पूजा एक ही दिन, 11 अक्टूबर को संपन्न होगी। 12 अक्टूबर, शनिवार को महानवमी की विशेष पूजा सुबह 5:48 बजे होगी और इसके बाद सुबह 9:10 बजे विजया दशमी की पूजा प्रारंभ होगी। उसी दिन शाम को मां दुर्गा का विसर्जन किया जाएगा। हालांकि इस दिन महास्नान नहीं होगा, परंतु हवन का आयोजन अवश्य किया जाएगा।


















