रांचीः मूलवासी और आदिवासियों ने अलग झारखंड राज्य के लिए एक लंबा संघर्ष किया. धरती आबा वीर सपूत बिरसा मुंडा ने जल-जंगल-जमीन के लिए अपनी शहादत दी. उक्त बातें प्रोजेक्ट भवन में आयोजित स्थापना दिवस के अवसर पर हेमंत सोरेन ने कही.
इस अवसर पर हेमंत सोरेन ने केन्द्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि भारत सरकार ने बिरसा भगवान की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रुप में मनाने की घोषणा की है. लेकिन, इस निर्णय तक पहुंचने में केन्द्र सरकार को 150 साल लग गएं. आखिरकार डेढ़ सदी बाद केन्द्र को बिरसा की याद आई. यह साबित करता है कि जनजातियों को अपने अधिकारों के लिए कितना लम्बा संघर्ष करना पड़ा. लेकिन अभी भी झारखंड के आदिवासियों-मूलवासियों के जीवन में कोई बदलाव नहीं आया. अभी भी संघर्ष को अनवरत बनाये रखने की अनिवार्यता है.
20 वर्षों में पहली बार हमारी सरकार आदिवासी मूलवासियों को सत्ता में हिस्सेदार बनाने के लिए नियमावली ला रही है. ताकि यहां के नौजवानों को रोजगार मिल सके. केन्द्र ने कभी हमारी भावनाओं को समझने का प्रयास नहीं किया. 20 सालों में पहली बार अच्छी चीजें देख रहा हूँ. 15 हजार से अधिक महिलाओं को फूलों-झानो आशीर्वाद योजना से जोड़ा गया, ताकि हड़िया-दारु की बिक्री करने की बेवसी से मुक्ति मिल सके. सच्चाई है कि अमीर और गरीब का खाई कम नहीं हो रही है. राज्य सरकार सीधी नियुक्ति देने का काम रही है. अनुवादक लेखकों को 1-1 लाख का प्रोत्साहन राशि दिए जाने का निर्णय लिया गया
इस अवसर पर राज्य सरकार द्वारा नियुक्ति पत्र और परिसंपत्तियों का वितरण किया गया. इसके साथ ही कई योजनाओं की शुरुआत की गईं. फूलों -झानो आशीर्वाद योजना के दूसरे चरण का शुभारंभ और फूलों-झानो आशीर्वाद योजना वेब पोर्टल और ट्रेकिंग सिस्टम का शुभारंभ किया गया.
इस अवसर पर सरहुल पत्रिका का विमोचन, 500 लैम्पस पैक्स और व्यापार मंडल को दो-दो लाख का कार्यशील पूंजी प्रदान की गई. आपका अधिकार, आपकी सरकार-आपके द्वार एप की लॉन्चिंग भी हुई.
रिपोर्ट- प्रतीक

















