प्रयागराज : गीता प्रेस के रसोई में गैस लीक होने से लगी थी महाकुंभ में आग। महाकुंभ में बीते रविवार को लगे भीषण अग्निकांड में कोई जानहानि नहीं हुई लेकिन उसकी भयावहता और विकरालत को देखते हुए कराई गई मजिस्ट्रेटी जांच में आग लगने और फैलने की कारणों का बिंदुवार ब्योरा सामने आ गया है।
यूपी सरकार की तरफ से जारी किए गए प्रेस नोट के अनुसार – ‘गीता प्रेस की रसोई में छोटे सिलेंडर से चाय बनाते समय सिलेंडर लीक हो जाने के कारण आग लगने की बात सामने आई है। आग लगने से रसोई में रखे करीब 2 गैस सिलेंडर फट गये तथा 40 घास-फूंस की झोपड़ियां और श्री संजीव प्रयागवाल के 6 टेंट जल गए।
…रविवार (19 जनवरी) को महाकुंभ मेला क्षेत्र में सेक्टर नं. 19 पुराना रेलवे ब्रिज व नये रेलवे ब्रिज के मध्य थानाक्षेत्र कोतवाली घूंसी अन्तर्गत करपात्री जी के शिविर के समीप गीता प्रेस गोरखपुर के शिविर की रसोई में समय करीब 16.10 बजे आग लगने की सूचना पर पहुंची फायर सर्विस द्वारा स्थानीय कल्पवासियों व पुलिस के सहयोग से आग को समय करीब 17.00 बजे बुझा लिया गया’।
15 मिनटों ने भीषण आग की लपटों की चपेट में था 5 हजार वर्गफीट इलाका
महाकुंभ मेला क्षेत्र में बीते रविवार को हुए भीषण अग्निकांड के दौरान के हालात की पड़ताल कई बारीक बिंदु और तथ्य सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि आग में कुल 40 झोपड़ियां और छह टेंट स्वाहा हो गए जबकि करीब 2.5 करोड़ से अधिक के नुकसान होने का अनुमान है। हादसे में 5 बाइकें और कुछ लाख की नकदी जलने की पुष्टि हुई है।
आग की सूचना पर सबसे पहले सेक्टर 19 और फिर अन्य सेक्टरों में स्थित फायर स्टेशनों से एक के बाद एक छोटी-बड़ी 35 फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। फायर सर्विस और पुलिस के साथ ही एनडीआरएफ ने भी पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया। तभी रसोई गैस सिलेंडरों के धमाके होते देख एकबारगी तो पुलिस व फायरकर्मियों को भी कदम पीछे की ओर खींचने पड़े।

हालांकि करीब 25 मिनट बाद धमाके बंद होने के बाद एक बार फिर पूरी ताकत से फायरकर्मियों ने बचाव कार्य शुरू किया। तब जाकर करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद शाम 5 बजे के करीब आग बुझाई जा सकी। हालांकि, सुलग रहे बांस-फूस को पूरी तरह ठंडा करने में दो घंटे से ज्यादा का वक्त लग गया। अंधेरा होने की वजह से बचाव कार्य में मोबाइल लाइट सिस्टम का भी सहारा लेना पड़ा।
आग बुझाए जाने के बाद मौके से कुछ अधजले सिलिंडर भी बरामद हुए। फायरकर्मियों ने फायर मिस्ट (मोटा पाइप) से उस पर करीब 10 मिनट तक पानी की बौछार कर उसे ठंडा किया।

महाकुंभ अग्निकांड की मजिस्ट्रेटी जांच में सामने आए और भी तथ्य…
इस भीषण अग्निकांड में 13 गैस सिलेंडरों के फटने , 3 लोगं के झुलसने और 2 के भगदड़ में घायल होने की बात सामने आई है । महाकुंभ 2025 के मेला क्षेत्र में बीते रविवार की सायं 4 बजे हुए भीषण अग्निकांड की जारी मजिस्ट्रेटी जांच में खुलासा हो गया है।
यह भी पुष्ट हो गया है कि एनडीआरएफ, दमकल, पुलिस और प्रशासनिक टीमों के राहत-बचाव टीम ने जितनी तत्परता से आग पर काबू के साथ आपातकालीन क्राउड मैनेजमेंट सिस्टम को प्रभावी तौर पर क्रियान्वित किया, उससे बड़ी अनहोनी से बचाव हो गया। घटना के वक्त शिविर में 50 से ज्यादा सिलिंडर रखे हुए थे जिनमें से एक-एक कर 13 फटे। शिविर में ही रसोईघर भी है।

राहत की बात रही कि आग रसोईघर तक नहीं पहुंच सकी। वर्ना उस भीषण आग की विभीषिका कुछ और होती। अग्निकांड से मेला क्षेत्र में अफरातफरी के बीच मची भगदड़ में 2 लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। इसी तरह 280 कॉटेज के जलकर खाक होने की पुष्टि करते हुए बताया गया कि अग्निकांड में संगम स्नान को पहुंचे 3 श्रद्धालु झुलस गए।
इनमें से यूपी के ही प्रतागढ़ के निवासी हैं जबकि दूसरे हरियाणा के और तीसरे पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के निवासी हैं। तीनों का उपचार केंद्रीय अस्पताल में कराया जा रहा है।

मंत्रियों संग CM Yogi की मौजूदगी से राहत-बचाव में आई तेजी, टली बड़ी अनहोनी
घटना के तुरंत बाद ही मौके पर खुद CM Yogi आदित्यनाथ के अपने तीन मंत्रियों (स्वतंत्र देव सिंह, राकेश सचान और एके शर्मा) के साथ मुस्तैद होते ही पूरा राहत-बचाव तंत्र युद्ध स्तर पर काम में जुटा लेकिन आग की भयावहता और विकरालता के चलते तनिक बाधा आई। लेकिन CM Yogi की मौक पर चपलता और फुर्ती को देख पूरा अमला अपने-अपने काम में पूरी मुस्तैदी से जुटा रहा।
मौके पर खुद CM Yogi आदित्यनाथ ने भी चपलता दिखाई एवं तुरंत जरूरी व्यवस्थागत निर्देश दिए। लोगों को अफवाहों पर ध्यान न देने को कहा। राहत-बचाव के साथ ही भगदड़ रोकने को अफवाहों से बचने की अपील किए जाने के साथ व्याकुल भीड़ को बाहर निकलने का सुगम मार्ग मुहैया कराया गया। सेक्टर 19 में जिस शिविर में आग लगी, उसके सामने स्थित मार्ग से ही कुछ देर बाद CM Yogi गुजरने ही वाले थे।

उससे पहले अफसरों संग बैठक करने व प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद CM Yogi संत-महात्माओं से मिलने अखाड़ों में पहुंचे हुए थे CM Yogi संतों से मिल ही रहे थे कि तभी घटना की सूचना आ गई। उस पर अफसर तुरंत घटनास्थल की ओर भागे और फिर खुद CM Yogi भी मौके की ओर लपके तो पूरे तंत्र के साथ मौजूद जनता भी राहत-बचाव में तत्परता से जुटी।
रह-रहकर सिलिंडर फटने के साथ ही धमाके होने लगे। धमाके इतने जबरदस्त थे कि कई किमी दूर तक इनकी गूंज सुनाई दी। तुरंत भगदड़ रोकने को पुलिसकर्मियों ने व्याकुल लोगों को बाहर निकलने देने के लिए मार्ग खाली कराया।

धमाकों के साथ फटते सिलेंडर के चलते उठी लपटों से तेज हवा ने बढ़ाई आग की विकरालता
मेला परिसर के सेक्टर 19 में पीपा पुल नंबर 12 के पास मोरी मार्ग पर नए और पुराने रेल पुल के बीच में अखिल भारतीय धर्म संघ, श्रीकरपात्री धाम वाराणसी और गीता प्रेस गोरखपुर का शिविर है। लगभग 5 हजार स्क्वॉयर फीट में फैले इस शिविर के आधे हिस्से में श्रीकरपात्री धाम और शेष हिस्से में गीता प्रेस से जुड़े करीब 1000 श्रद्धालु लगभग 300 कॉटेज में ठहरे हुए थे।

गनीमत रही कि इनमें से कुछ ही आग की चपेट में आए। दरअसल शिविर में एक हजार से ज्यादा लोग रहने के लिए आए हैं और उनके खाने-पीने का इंतजाम भी वहीं किया गया है। शिविर में ही रसोईघर भी है। राहत की बात रही कि आग रसोईघर तक नहीं पहुंच सकी। हादसे के दौरान आग के कुछ ही मिनटों में पूरे शिविर में फैलने और विकराल रूप धरने का एक कारण तेज हवा भी रही।
दरअसल, सिलिंडर फटने पर तेज धमाके के साथ आग के गोले भी ऊपर की ओर उठ रहे थे। इसी दौरान हवा की चपेट में आने से यह एक साथ कई- कई कॉटेजों तक पहुंच जा रही थी और यही वजह थी इतने बड़े शिविर में आग को फैलने में 15 मिनट से भी कम का वक्त लगा। महाकुंभ मेले में हुई आगजनी के वाद गीता प्रेस के ट्रस्टी बदहवास नजर आए।

हादसे में गीता प्रेस के कर्मचारियों के मोबाइल भी जलने की सूचना है। कुछ दूर पर स्थित शिविर में रखे एक करोड़ से अधिक के धर्मग्रंथ पूरी तरह से सुरक्षित बच गए।
गीता प्रेस के ट्रस्टी कृष्ण कुमार खेमका ने मीडिया से कहा- ‘हमारे लगभग 180 कॉटेज बने हुए थे। हमने बहुत सावधानी से बनाया था। सभी को मना किया गया था कि किसी प्रकार का अग्नि का कोई काम ना करें। जहां हमने सीमा बनाई, उसके पार सर्कुलेटिव एरिया घोषित किया गया था। पता नहीं प्रशासन ने वह जगह किसे दी… उस तरफ से अग्नि की कोई चीज हमारी तरफ आई और आग फैल गई’।


















