रणक्षेत्र में तब्दील हुआ पटना का अस्पताल, परिजनों ने कहा- केवल हो रहा है पैसा उगाही

पटना : राजधानी पटना के कंकड़बाग थाना क्षेत्र के बाईपास में स्थित पटना एडवांस सेंट्रल अस्पताल में उस
समय हंगामा हुआ। जब कुछ दिन पूर्व विक्की पांडे अपनी पत्नी का इलाज करवाने के लिए इसी अस्पताल में भर्ती करवाया था। इसके बाद अस्पताल परिसर के बाहर जमकर हंगामा हुआ और अस्पताल रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पैसे की उगाही कर रहा है और ढंग से इलाज नहीं कर पा रहा है।

आपसे अस्पताल वाले कब इलाज के नाम पर लाखों की वसूली कर लें, कोई नहीं जानता

बिहार के किसी हिस्से से इलाज के लिए पटना के किसी निजी अस्पताल में आ रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। ये हम नहीं कह रहे हैं मरीजों का अनुभव बता रहा है। आपसे अस्पताल वाले कब इलाज के नाम पर लाखों की वसूली कर लें, कोई नहीं जानता। रोहतास जिले से आई एक मरीज के परिजनों से निजी अस्पताल ने इलाज के नाम पर 10 लाख रुपए ले लिए हैं।

मरीज के परिजनों से वसूले 10 लाख, स्थिति गंभीर

पति वक्की पांडे ने कहा कि आगामी 15 मार्च को मेरी पत्नी होश में आई। उस वक्त 50 फीसदी उसकी हालत सही थी। 16 मार्च को स्थिति और खराब हुई और वो 40 फीसदी ठीक रही। 17 मार्च को उसकी स्थिति और खराब हो गई। वो महज 20 प्रतिशत ठीक दिख रही थी। 18 मार्च को भी उसकी स्थिति डाउन होते गई। उसके बाद मैं अपनी पत्नी को दिखाने के लिए दूसरी जगह ले जाना चाहा अस्पताल वालों ने जाने नहीं दिया। उसके बाद मुझे अंधकार में रखा गया। ये पूरी घटना पटना एडवांस सेंट्रल अस्पताल की है जो कि कंकड़बाग थाना क्षेत्र में आता है। ये सारे आरोप परिजन के हैं। यह आज भी बिल बनाकर मुझसे डेढ़ लाख रुपए की मांग कर रहे हैं। मैं इनको 10 लाख रुपया पहले ही दे चुका हूं। ढाई लाख रुपए का बाहर से दवाई मंगा चुका हूं।

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मरीज के साथ मनमानी

आपको बता दें कि रोहतास जिले के नटवार थाना के नियाजीपुर गांव के रहने वाले विक्की पांडेय का है। इस दर्द को आप महसूस कर सकते हैं। किसी की पत्नी को इलाज के नाम पर अस्पताल में भर्ती करना उससे 10 लाख रुपए वसूल लेना, लगातार मरीज की स्थिति का खराब होना, किसी अन्य अस्पताल में जाने नहीं देना। ये पटना के निजी अस्पतालों के नेक्सस को दर्शाता है। जिसके सामने आम आदमी लाचार है। सूत्र बताते हैं कि पटना के सिविल सर्जन, हेल्थ डिपार्टमेंट और स्वास्थ्य मंत्री को इन निजी अस्पतालों की मनमानी के बारे में पता है, लेकिन सबका मुंह बंद है। राजधानी पटना में सरकार के सभी मानकों की खिल्ली उड़ाते हुए ऐसे अस्पताल धड़ल्ले से चल रहे हैं। इन्हें देखने वाला कोई नहीं है। जब इस पूरे मामले पर अस्पताल संचालक से बात हुई तो सुरेंद्र कुमार ने कहा कि मरीज अभी भी जीवित है और उसका इलाज चल रहा है। सवाल उठना लाजिमी है कि लगातार निजी अस्पतालों का मनमानी चलते रहता है और आए दिन यह घटना आम हो चुकी है। अब देखने वाली बात होगी कि इस पहले नेक्सस को राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग कैसे लगाम लगा पाती है। क्योंकि कई अस्पताल ऐसे भी हैं जो इलाज के नाम पर मौत बेच रहे हैं।

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चंदन कुमार तिवारी की रिपोर्ट

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