रांची: राज्य के हाईस्कूल और प्लस टू विद्यालयों में अब शिक्षक के साथ-साथ प्रधानाचार्य का भी अलग कैडर होगा। शिक्षा विभाग की ओर से जारी नई नियमावली के अनुसार, कक्षा 9वीं से 12वीं तक संचालित स्कूलों के लिए एक प्रधानाचार्य नियुक्त किया जाएगा।
अब तक केवल हाइस्कूल के लिए प्रधानाध्यापक की नियुक्ति होती थी, लेकिन अपग्रेड स्कूलों में स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं थे। इस नई व्यवस्था से प्रशासनिक और शैक्षणिक दोनों स्तर पर कार्यप्रणाली को मजबूती मिलेगी।
ऐसे शिक्षक होंगे पात्र
प्रधानाचार्य बनने के लिए न्यूनतम आठ वर्षों का शैक्षणिक अनुभव आवश्यक होगा। वहीं, कक्षा 9वीं व 10वीं के लिए नियुक्त शिक्षकों को कम-से-कम 15 वर्षों का अनुभव होना चाहिए।
500 अंकों की होगी नियुक्ति परीक्षा
नियुक्ति परीक्षा कुल 500 अंकों की होगी, जिसमें दो पेपर शामिल होंगे:
पहला पेपर (200 अंक): सामान्य ज्ञान, जिसमें कंप्यूटर संचालन की सामान्य जानकारी भी शामिल होगी।
दूसरा पेपर (300 अंक): उम्मीदवार के विषय से संबंधित स्नातकोत्तर स्तरीय परीक्षा।
दोनों पेपर तीन घंटे की अवधि के होंगे। मेरिट लिस्ट कुल अंकों के आधार पर बनेगी और सफल होने के लिए अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को न्यूनतम 50% तथा अनुसूचित जाति/जनजाति के अभ्यर्थियों को 45% अंक लाना अनिवार्य होगा।
राज्य स्तर पर होगा प्रधानाचार्य का कैडर
प्रधानाचार्य पद का कैडर राज्य स्तरीय होगा। नियुक्ति प्रक्रिया की जिम्मेदारी झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की होगी। चयन के बाद नियुक्ति पत्र माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा जारी किए जाएंगे। एक से अधिक अभ्यर्थियों को समान अंक मिलने पर उम्र के आधार पर वरीयता दी जाएगी।
सीधी भर्ती और प्रोन्नति दोनों विकल्प
स्कूलों में 50% पदों पर सीधी नियुक्ति होगी जबकि शेष 50% पदों पर योग्य शिक्षकों को प्रोन्नति दी जाएगी। सीधी नियुक्ति के लिए मान्यता प्राप्त बोर्ड में कार्यरत शिक्षक आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष और अधिकतम 45 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्गों को अधिकतम आयु सीमा में छूट दी गई है। उम्र की गणना विज्ञापन वर्ष की 1 अगस्त से की जाएगी।
इस पहल से राज्य के विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है और नेतृत्व क्षमता वाले अनुभवी शिक्षकों को उचित प्रशासनिक भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।







