Garhwa : महुआ चुनने गई, शव बनकर लौटी महिला, आठ दिन में चार की मौत…

Garhwa : गढ़वा जिले के रंका वन प्रमंडल अंतर्गत भंवरी के जंगल में एक और दर्दनाक हादसा सामने आया। महुआ चुनने गई एक वृद्ध महिला को जंगली हाथी ने कुचलकर मार डाला। मृतका की पहचान चिलबिलिया कुंवर के रूप में हुई है, जो बेहद गरीब और असहाय परिवार से ताल्लुक रखती थीं। यह घटना क्षेत्र में हाथियों के बढ़ते आतंक की ताजा कड़ी है।

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ग्रामीणों के अनुसार, चिलबिलिया रोज की तरह सुबह-सवेरे जंगल में महुआ के डोरी (गिरे हुए फूल) चुनने गई थीं। तभी अचानक एक जंगली हाथी वहां पहुंच गया और उन्हें दौड़ाकर कुचल डाला। जब महिला शाम तक घर नहीं लौटी, तो परिजन परेशान हो उठे और गांववालों के साथ जंगल में खोजबीन शुरू की। काफी तलाश के बाद महिला का शव एक पेड़ के नीचे मिला, जहां आसपास हाथी के पैरों के ताजे निशान साफ देखे गए।

Garhwa : प्रशासन सक्रिय, वन विभाग ने दी तात्कालिक राहत

Garhwa : मामले की जांच पड़ताल करती वन विभाग की टीम
Garhwa : मामले की जांच पड़ताल करती वन विभाग की टीम

घटना की सूचना मुखिया प्रतिनिधि शंभू कुमार गुप्ता ने रंका थाना प्रभारी चेतन कुमार सिंह और वन विभाग को दी। पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। वन विभाग ने तात्कालिक राहत के रूप में मृतका के परिवार को ₹50,000 की राशि दी, और ₹3.5 लाख अतिरिक्त मुआवजे की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का आश्वासन दिया।

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यह कोई पहली घटना नहीं है। छह दिन पहले रंका थाना क्षेत्र के दुधवल पंचायत अंतर्गत नगारी गांव के विजय सिंह की भी हाथी हमले में मौत हो गई थी। वहीं चिनिया प्रखंड में भी दो और लोगों की जान हाथी के हमले में जा चुकी है। यानी केवल आठ दिनों में चार मौतें हो चुकी हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल है।

लगातार बढ़ रही हैं हाथी से मौतें, ग्रामीणों में दहशत

Garhwa : जानकारी देते ग्रामीण
Garhwa : जानकारी देते ग्रामीण

वन विभाग ने हाथियों को नियंत्रित करने के लिए पश्चिम बंगाल से 11 सदस्यीय हाथी विशेषज्ञ दल मंगाया है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक इस दल की कोई उपस्थिति नजर नहीं आई है। सवाल उठ रहे हैं कि जब लगातार लोग मारे जा रहे हैं, तो विशेषज्ञों का काम कहां और कैसे हो रहा है?

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वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी गोपाल चंद्र ने कहा कि हाथी को जंगल से बाहर खदेड़ना कठिन हो गया है, क्योंकि ग्रामीणों ने जंगल से सटे इलाकों में घर और खेत बना लिए हैं। उन्होंने कहा, “हाथी अगर जंगल में नहीं रहेगा तो जाएगा कहां? हम कोशिश कर रहे हैं कि उसे नुकसान पहुंचाए बिना मानव बस्तियों से दूर किया जाए।”

ग्रामीणों की मांगें

घटनाओं से आक्रोशित और भयभीत ग्रामीणों ने सरकार व प्रशासन से चार प्रमुख मांगें रखी हैं:

  1. हाथियों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी और ठोस कदम उठाए जाएं।
  2. जंगलों से सटे गांवों में चेतावनी प्रणाली और गश्ती बढ़ाई जाए।
  3. मृतकों के परिजनों को शीघ्र और समुचित मुआवजा दिया जाए।
  4. वनोपज संग्रह के समय लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए जाएं।

घटना के बाद फिलहाल पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है, और ग्रामीण अब जंगल जाने से डरने लगे हैं, जबकि उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत वहीं है। अब देखना होगा कि प्रशासन और वन विभाग इस संकट से निपटने के लिए कितनी तेजी और गंभीरता दिखाते हैं।

आकाश कुमार की रिपोर्ट–

Saffrn

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