IIT पटना में नवाचार और स्थायित्व पर केंद्रित ‘कंस्ट्रक्शन कॉन्क्लेव 2.0’ शुरू

नवाचार और स्थायित्व पर केंद्रित ‘कंस्ट्रक्शन कॉन्क्लेव 2.0’ का IIT पटना में शुभारंभ

पटना: IIT पटना के सिविल एवं पर्यावरण अभियांत्रिकी विभाग द्वारा निर्माण उद्योग में सततता, नवाचार एवं सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दो दिवसीय ‘कंस्ट्रक्शन कॉन्क्लेव 2.0’ का शुभारंभ किया गया। यह कॉन्क्लेव टाटा स्टील और बीएमडब्ल्यू वेंचर्स के सहयोग से दिनांक 17-18 जुलाई को आयोजित किया जा रहा है। कार्यशाला की शुरुआत संयोजक डॉ वैभव सिंघल, डॉ नितिन कुमार एवं डॉ अनुप के केसरी (एसोसिएट डीन, अनुसंधान एवं विकास) सहित विशिष्ट अतिथियों संदीप तालुकदार (सीनियर एरिया मैनेजर, टाटा स्टील), पवित्र बिस्वास (टिस्कॉन रिटेल, बिहार) एवं नीरज बंगड़ (सेल्स हेड, बीएमडब्ल्यू वेंचर्स) ने पारंपरिक दीप प्रज्वलित कर की।

यह कॉन्क्लेव टाटा स्टील की ‘टिस्कॉन ग्रैंडमास्टर’ पहल का एक भाग है, जिसका उद्देश्य निर्माण क्षेत्र, विशेष रूप से नवोदित अभियंताओं को सशक्त बनाना है। अपने उद्घाटन संबोधन में डॉ वैभव सिंघल ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत के मध्य की खाई को पाटने में सहायक सिद्ध होते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यह मंच विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं एवं उद्योग के अनुभवी पेशेवरों को एक साथ लाकर सिविल इंजीनियरिंग से संबंधित जटिल समस्याओं के समाधान हेतु नवोन्मेषी एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।

कार्यशाला में स्टील के उन्नत अनुप्रयोग, सुदृढ़ कंक्रीट संरचनाओं की स्थायित्व, रेट्रोफिटिंग तकनीक, शून्य-ऊर्जा भवनों का विकास तथा लागत-कुशल आवासीय समाधान जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इस अवसर पर डॉ अनुप के केसरी ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति का आकलन इस आधार पर किया जा सकता है कि वह कितना इस्पात उत्पादन एवं उपभोग करता है, क्योंकि यह विकास का संकेतक है। उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 46% इस्पात का उपयोग निर्माण क्षेत्र में होता है, जो देश के अवसंरचना विकास में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।

प्रतिभागियों को IIT पटना के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में आयोजित प्रयोगशाला सत्रों में भाग लेने का अवसर भी मिलेगा, जहाँ वे अत्याधुनिक निर्माण तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करेंगे। कॉन्क्लेव के पहले दिन विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें सिविल इंजीनियरों की भूमिका को सतत एवं समावेशी भविष्य के निर्माण में अनिवार्य बताया गया। वक्ताओं ने यह भी रेखांकित किया कि निर्माण तकनीकों को अधिक टिकाऊ, कुशल एवं भविष्योन्मुख बनाना समय की आवश्यकता है।

उद्घाटन सत्र का समापन डॉ नितिन कुमार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं सहयोगी संस्थानों को इस आयोजन को सफल बनाने में दिए गए सक्रिय योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।

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