झारखंड में बिना मान्यता वाले 5,879 स्कूलों की अब खैर नहीं। हाईकोर्ट आदेश के बाद नियमावली संशोधित, अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू।
रांची: झारखंड में बिना मान्यता वाले 5,879 स्कूलों की अब खैर नहीं। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद “झारखंड निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमावली” में संशोधन किया है। अब सभी स्कूलों को अनिवार्य रूप से मान्यता लेनी होगी।
शिक्षा विभाग ने इस प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन पोर्टल में बदलाव शुरू कर दिए हैं। विभागीय सचिव उमाशंकर सिंह ने बताया कि सितंबर अंत तक पोर्टल अपडेट हो जाएगा और अक्टूबर से जिला स्तर पर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
Key Highlights
झारखंड में 5,879 बिना मान्यता वाले स्कूलों की अब खैर नहीं
अक्टूबर से ऑनलाइन पोर्टल पर मान्यता आवेदन प्रक्रिया शुरू
8.37 लाख बच्चे प्रभावित, 46,421 शिक्षक कार्यरत
मान्यता आवेदन पर कोई शुल्क नहीं
31 मार्च 2025 तक सभी स्कूलों को मान्यता लेना अनिवार्य
झारखंड में स्थिति
देशभर में पिछले वर्ष 22,298 स्कूल बिना मान्यता के थे, जिनमें 24,34,238 विद्यार्थी नामांकित थे। अकेले झारखंड में 5,879 स्कूल बिना मान्यता के चल रहे हैं। इन स्कूलों में 8,37,879 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं और 46,421 शिक्षक कार्यरत हैं।
संशोधित नियमावली की मुख्य बातें
स्कूलों को मान्यता आवेदन पर कोई शुल्क नहीं देना होगा।
मान्यता समिति में सदस्यों की संख्या कम की गई है।
अक्टूबर से ऑनलाइन पोर्टल पर जिला स्तर पर आवेदन जमा किए जा सकेंगे।
सभी स्कूलों को 31 मार्च 2025 तक मान्यता लेना अनिवार्य होगा।
केंद्र सरकार पहले ही सभी राज्यों को पत्र लिखकर बिना मान्यता वाले स्कूलों पर कार्रवाई करने का निर्देश दे चुकी है।
असर और महत्व
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम बच्चों की शिक्षा और स्कूलों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अहम है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2011 से लागू है, लेकिन झारखंड में अब तक हजारों स्कूल बिना मान्यता चल रहे थे। अब यह संशोधन उन्हें अनिवार्य रूप से मान्यता लेने पर मजबूर करेगा।
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