संविधान दिवस के 76 साल पूरे, जानें PM Modi ने नागरिकों से क्या की अपील

PM Modi ने आज (26 नवंबर) को संविधान दिवस के 76 साल होने की बधाई दी. साथ ही 76वां संविधान दिवस (76th Constitution Day) के मौके पर पीएम मोदी ने सभी नागरिकों से अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करने की अपील की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह एक मजबूत लोकतंत्र की नींव है. इसके साथ ही अपने बयान में पीएम मोदी ने नागरिकों से कहा कि आप अपने मतदान के अधिकार का प्रयोग करके लोकतंत्र को और भी मजबूत बनाए. उन्होंने कहा कि संविधान दिवस के अवसर पर मैं उन लोगों का सम्मान करता हूं जो, अपने 18 साल की उम्र पूरी करके पहली बार मतदान किए हैं.

PM Modi ने ये कहा

PM Modi ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘संविधान दिवस (76th Constitution Day) पर, हम अपने संविधान निर्माताओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं. उनकी दूरदर्शिता हमें एक विकसित भारत के निर्माण के लिए निरंतर प्रेरित करती है. हमारा संविधान मानवीय गरिमा, समानता और स्वतंत्रता को सर्वोच्च महत्व देता है. यह हमें अधिकारों से सशक्त बनाने के साथ-साथ, नागरिक के रूप में हमारे कर्तव्यों की भी याद दिलाता है, जिन्हें हमें सदैव निभाने का प्रयास करना चाहिए. ये कर्तव्य एक सशक्त लोकतंत्र की नींव हैं. आइए, हम अपने कार्यों के माध्यम से संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराएं.’

PM Modi's tweet on 76th Constitution Day
PM Modi’s tweet on 76th Constitution Day

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संविधान ने दिया PM बनने का मौका

इस पोस्ट के साथ पीएम मोदी ने एक अपने पत्र का लिंक भी साझा किया, जिसमें उन्होंने लिखा, ’26 नवंबर हर भारतीय के लिए बहुत गौरवशाली दिन है. इसी दिन 1949 में संविधान सभा ने भारत के संविधान को अंगीकार किया था. इसलिए एक दशक पहले, साल 2015 में एनडीए सरकार ने 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था. हमारा संविधान एक ऐसा पवित्र दस्तावेज है, जो निरंतर देश के विकास का सच्चा मार्गदर्शक बना हुआ है.

ये भारत के संविधान की ही शक्ति है जिसने मुझ जैसे गरीब परिवार से निकले साधारण व्यक्ति को प्रधानमंत्री के पद पर पहुंचाया है. संविधान की वजह से मुझे 24 वर्षों से निरंतर सरकार के मुखिया के तौर पर काम करने का अवसर मिला है. मुझे याद है, साल 2014 में जब मैं पहली बार संसद भवन में प्रवेश कर रहा था, तो सीढ़ियों पर सिर झुकाकर मैंने लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर को नमन किया। साल 2019 में जब चुनाव परिणाम के बाद मैं संसद के सेंट्रल हॉल में गया था, तो सहज ही मैंने संविधान को सिर माथे लगा लिया था.’

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