बिजली बिल या बिजली का झटका – जेबीवीएनएल ने 2026–27 में 50% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार, घरेलू दर 10 रुपये/unit तक जा सकती है

झारखंड में बिजली दरें बढ़ सकती हैं. जेबीवीएनएल ने 2026–27 के लिए टैरिफ में 50% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव बनाया है. घरेलू दर 10 रुपये प्रति यूनिट रखने की तैयारी.


बिजली बिल या बिजली का झटका : जेबीवीएनएल ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए बिजली दरों में बड़ी बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार कर लिया है. निगम ने दावा किया है कि बढ़ती ऊर्जा लागत, पावर परचेज एग्रीमेंट के खर्च, पुरानी देनदारियों और वितरण प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए जरूरी निवेश को देखते हुए संशोधित टैरिफ संरचना तैयार की गई है. यह प्रस्ताव 30 नवंबर 2025 तक झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (जेएसइआरसी) के पास दाखिल किया जाएगा.

बिजली बिल या बिजली का झटका :

सूत्रों के अनुसार, निगम ने घरेलू उपभोक्ताओं की दर 10 रुपये प्रति यूनिट तक बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है. वहीं औद्योगिक उपभोक्ताओं की दर 9 रुपये प्रति यूनिट रखने की बात कही गई है. हालांकि इस पर अंतिम निर्णय केवल जेएसइआरसी ही लेगा.


Key Highlights:

  • जेबीवीएनएल ने 2026–27 के लिए बिजली दरों में 50% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव बनाया है.

  • घरेलू उपभोक्ताओं की दर 10 रुपये प्रति यूनिट और औद्योगिक दर 9 रुपये प्रति यूनिट प्रस्तावित.

  • पिटीशन 30 नवंबर 2025 तक जेएसइआरसी में दाखिल किया जाएगा.

  • निगम पर हर साल 400–500 करोड़ रुपये का घाटा, एटीएंडसी लॉस करीब 20%.

  • बिजली खरीद लागत, स्मार्ट मीटरिंग और नेटवर्क सुधार के लिए बड़ा निवेश जरूरी.

  • अंतिम निर्णय जन-सुनवाई के बाद जेएसइआरसी लेगा.


बिजली बिल या बिजली का झटका : फिलहाल लागू (2025–26) बिजली दरें और प्रस्तावित बदलाव

निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, मौजूदा वित्तीय वर्ष में घरेलू शहरी उपभोक्ताओं की दर 6.85 रुपये प्रति यूनिट और ग्रामीण उपभोक्ताओं की दर 6.70 रुपये प्रति यूनिट है. पिछले साल जेबीवीएनएल ने करीब 40% बढ़ोतरी का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन आयोग ने केवल 6.34% वृद्धि की मंजूरी दी थी.

मौजूदा बनाम प्रस्तावित दरें (चयनित श्रेणी):

श्रेणीवर्तमान दर (₹/यूनिट)प्रस्तावित दर (₹/यूनिट)फिक्स्ड चार्ज स्थिति
ग्रामीण घरेलू6.30प्रस्तावित 10 (संभावित)75
शहरी घरेलू6.65–6.85प्रस्तावित 10100
एचटी उपभोक्ता6.25/केवीएएएच6.40150
कॉमर्शियल एलटी6.10–6.656.20–6.70120–200
औद्योगिक एलटी/एचटी5.30–6.059 रुपये प्रति यूनिट प्रस्तावित

(नोट: प्रस्ताव में बदलाव आयोग की सुनवाई पर निर्भर होंगे.)


बिजली बिल या बिजली का झटका : निगम की आर्थिक स्थिति: हर साल 400–500 करोड़ रुपये का घाटा

जेबीवीएनएल का कहना है कि बिजली खरीद, रखरखाव और मेंटेनेंस पर उसका सालाना खर्च 12,000 करोड़ रुपये के करीब है. इसके मुकाबले निगम की आय 6,000–7,000 करोड़ रुपये के बीच रहती है. यानी हर साल 400–500 करोड़ रुपये का घाटा बनता है.

निगम का एटीएंडसी लॉस भी लगभग 20% है, जो राजस्व अंतर को और बढ़ाता है. स्मार्ट मीटर, पुराने ट्रांसफार्मरों के बदलाव, ग्रामीण सप्लाई को मजबूत करने और लाइन लॉस कम करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत है.

बिजली बिल या बिजली का झटका : एमडी का पद रिक्त, फिर भी पिटीशन दाखिल की तैयारी

दिलचस्प बात यह है कि निगम में पिछले दो माह से मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) की नियुक्ति नहीं हो सकी है. इससे अंतिम निर्णय लंबित है. हालांकि सूत्रों के अनुसार टैरिफ पिटीशन नियामक आयोग में समय पर दाखिल कर दिया जाएगा और बाद में निदेशक मंडल की बैठक में इसे औपचारिक मंजूरी मिल जाएगी.

उपभोक्ताओं पर असर: बिजली बिलों का बोझ बढ़ना तय

यदि आयोग ने पिटीशन को मंजूरी दी तो घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं दोनों पर बिजली बिल का बोझ काफी बढ़ सकता है. जन-सुनवाई के दौरान उपभोक्ता संगठन और उद्योग संगठन अपनी आपत्तियां दर्ज करेंगे.

निगम के अधिकारियों का कहना है कि प्रस्ताव का उद्देश्य राजस्व अंतर कम करना, वितरण तंत्र को आधुनिक बनाना और उपभोक्ताओं को बेहतर, अबाधित और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना है.

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