Koderma: जिले से एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। खांसी सहित अन्य बीमारियों से परेशान एक डेढ़ वर्षीय बच्ची की रविवार को मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि दवा दुकान से खरीदे गए कफ सिरप के सेवन के बाद बच्ची की हालत तेजी से बिगड़ती चली गई और कुछ ही घंटों में उसकी मौत हो गई। मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है और जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
कफ सिरप पीने के बाद बिगड़ी हालतः
सदर थाना क्षेत्र के लोकाई भुइयां टोला निवासी रवि भुइयां की डेढ़ वर्षीय बच्ची रागिनी कुमारी को पिछले दो दिनों से खांसी थी। बच्ची की मां के अनुसार, उन्होंने दूधीमाटी चौक के पास स्थित एक दवा दुकान से पूछकर कफ सिरप (टिक्सीलिक्स) खरीदा और गुरुवार शाम बच्ची को पिलाया। सीरप देने के कुछ ही समय बाद बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी।परिजन तुरंत बच्ची को कोडरमा सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही बच्ची की मौत हो चुकी थी। चिकित्सकों ने जांच के बाद बच्ची को मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमार्टम से परिजनों का इनकारः
अस्पताल प्रशासन की ओर से पोस्टमार्टम कराने का सुझाव दिया गया था, लेकिन परिजनों ने इससे इनकार कर दिया और बच्ची का शव अपने साथ ले गए। इस मामले में अब तक परिजनों की ओर से कोई लिखित शिकायत भी दर्ज नहीं कराई गई है, जिससे जांच प्रक्रिया में कई चुनौतियां सामने आ रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने दिए जांच के आदेशः
मामले के संज्ञान में आने के बाद जिले के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार ने ड्रग इंस्पेक्टर को जांच कर उचित कार्रवाई का निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि जांच में यह देखा जाएगा कि कफ सिरप किस कंपनी का था, उसकी एक्सपायरी डेट क्या थी, दवा किस मात्रा में और किस तरह से दी गई, साथ ही संबंधित मेडिकल दुकान की भूमिका की भी जांच की जाएगी। सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि बच्ची की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
छोटे बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं मानी जाती यह दवाः
चिकित्सकों के अनुसार, जिस कफ सिरप (टिक्सीलिक्स) का सेवन बच्ची ने किया, उसमें डेक्सट्रोमेथॉर्फन और क्लोरफेनिरामाइन मैलिएट जैसे तत्व होते हैं, जिन्हें चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता है। भारत सरकार की ओर से भी ऐसे घटकों वाली दवाओं को छोटे बच्चों में बिना चिकित्सकीय सलाह के उपयोग न करने के निर्देश जारी किए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों में इस तरह की दवाओं के उपयोग से सांस दबना, अत्यधिक नींद, उल्टी और दौरे पड़ने जैसे गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
डॉक्टरी सलाह के बिना दवा लेना खतरनाकः
यह मामला एक बार फिर इस बात की चेतावनी देता है कि बिना डॉक्टर की सलाह के छोटे बच्चों को दवा देना जानलेवा साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों की किसी भी बीमारी में स्वयं दवा देने के बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श जरूर लें। फिलहाल, ड्रग इंस्पेक्टर की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।
Highlights


