
Patna News: न्यायिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुलभ और जनोन्मुखी बनाने में तकनीक की भूमिका निर्णायक है. सही तकनीकी हस्तक्षेप न केवल न्यायिक प्रक्रिया को तेज करता है, बल्कि दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों तक भी न्याय की पहुंच आसान बनाता है. यह विचार भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने शनिवार को पटना हाईकोर्ट परिसर में व्यक्त किए. पटना हाईकोर्ट में आयोजित एक गरिमामय समारोह के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने सात महत्वपूर्ण आधारभूत संरचनाओं की आधारशिला रखी. इनमें आई-ब्लॉक भवन, हॉस्पिटल भवन, मल्टीलेवल पार्किंग, एडवोकेट जनरल कार्यालय, कर्मियों का आवास, एनेक्सी भवन और अन्य आवश्यक संरचनाएं शामिल हैं. इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से न केवल हाईकोर्ट की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि न्याय वितरण प्रणाली को भी नई मजबूती मिलेगी.
Patna News: डिजिटल न्याय की ओर बढ़ता कदम
अपने संबोधन में न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि तकनीक के माध्यम से दस्तावेजों और डाटा का डिजिटलाइजेशन कर न्यायिक प्रणाली को अधिक उपयोगकर्ता-केंद्रित बनाया जा सकता है. इससे विशेष रूप से गरीब, वंचित और कमजोर वर्गों को सशक्त तरीके से न्याय उपलब्ध हो सकेगा. उन्होंने डिजिटल डिवाइड को पाटने पर जोर देते हुए कहा कि समावेशी न्याय व्यवस्था के लिए यह अनिवार्य है. इस अवसर पर उन्होंने पटना उच्च न्यायालय की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट के इलेक्ट्रॉनिक संस्करण ई-एसीआर का भी लोकार्पण किया, जिसे न्यायिक प्रशासन में एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल माना जा रहा है.
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Patna News: इतिहास से भविष्य तक की यात्रा
मुख्य न्यायाधीश ने अपने वक्तव्य में बिहार की गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय केवल स्थापत्य का उदाहरण नहीं था, बल्कि खुली बहस, तार्किक चिंतन और ज्ञान के आदान-प्रदान का वैश्विक केंद्र था. इसी तरह प्राचीन पाटलिपुत्र सत्ता का ही नहीं, बल्कि लोक कल्याण और प्रशासनिक दक्षता का भी प्रतीक रहा है. उन्होंने कहा कि पटना हाईकोर्ट आज संवैधानिक मूल्यों, स्वतंत्रता और न्यायिक अधिकारों के विस्तार का सशक्त केंद्र बन चुका है.
Patna News: न्याय के पीछे इंसान, मशीन नहीं
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने प्रस्तावित ऑडिटोरियम और हॉस्पिटल भवन की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऑडिटोरियम विचार-विमर्श और न्यायिक संवाद का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है, जबकि हॉस्पिटल भवन यह याद दिलाता है कि न्याय मशीनों से नहीं, बल्कि इंसानों के माध्यम से दिया जाता है. तनावपूर्ण माहौल में काम करने वाले न्यायिक अधिकारियों और कर्मियों के स्वास्थ्य की देखभाल अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने न्याय की मूल भावना को रेखांकित करते हुए कहा कि न्याय का वास्तविक अर्थ सबसे कमजोर व्यक्ति को आवाज देना है और यह सुनिश्चित करना है कि जरूरतमंदों को समय पर न्याय मिले.
Patna News: अन्य न्यायाधीशों के विचार
कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति ए. अमानुल्लाह ने कहा कि न्याय में कभी देरी नहीं होनी चाहिए और आधारभूत संरचनाओं को बहाना बनाकर न्याय से समझौता नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने पटना हाईकोर्ट की सराहना करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद यहां बेहतर न्याय प्रदान किया गया है. वहीं, न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने अदालतों को ‘न्याय का मंदिर’ बताते हुए कहा कि मजबूत आधारभूत ढांचे से न्याय वितरण की गति बढ़ती है. उन्होंने बिहार में हो रहे सकारात्मक बदलावों की भी चर्चा की.
Patna News: 320 करोड़ की न्यायिक आधारशिला
स्वागत भाषण में पटना हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि सातों परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 320 करोड़ रुपये है. उन्होंने कहा कि मजबूत आधारभूत संरचना से न्यायिक प्रणाली अधिक प्रभावी और तेज होगी. कार्यक्रम में कई वरिष्ठ न्यायाधीश, अधिकारी, अधिवक्ता और प्रशासनिक पदाधिकारी उपस्थित रहे. मुख्य न्यायाधीश का पारंपरिक रूप से शाल, मधुबनी पेंटिंग और पौधा भेंट कर स्वागत किया गया.
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