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बिहार में भी है राजपुतों का चित्तौड़गढ़, जहां 700 क्षत्राणियों ने अग्निकुंड में दी अपनी आहुति, जानिए वीरांगनाओं के शौर्य की कहानी

बिहार में भी है राजपुतों का चित्तौड़गढ़, जहां 700 क्षत्राणियों ने अग्निकुंड में दी अपनी आहुति, जानिए वीरांगनाओं के शौर्य की कहानी

गयाजी : जिले में मुगल आक्रांताओं के खिलाफ वीर क्षत्राणियों का जौहर सिर्फ राजस्थान के चित्तौड़गढ़ ही नहीं, बल्कि बिहार में भी हुआ था। बिहार के गया जी में जौहर मंदिर है, जो वीरंगनाओं के ऐतिहासिक शौर्य की गाथा को दर्शाता है। यूं तो जौहर के संबंध में उल्लेख होता है, तो राजस्थान के चित्तौड़गढ़ का नाम आता हैं, किंतु बिहार में भी एक ‘चित्तौड़गढ़’ है, जहां की एक-दो नहीं बल्कि 700 से अधिक महिलाओं ने जौहर किया था।

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14वीं शताब्दी में मुस्लिम आक्रांताओं ने जब रेवई गढ किले (आज का गया का रेवई इलाका) को जीता, राजा वीरगति को प्राप्त हुए, तो क्षत्राणियों ने मुस्लिम आक्रांताओं से पहले संघर्ष किया।  फिर अपनी पराजय निश्चित जान अग्निकुंड प्रज्ज्वलित कर किले से छलांग लगाकर जौहर किया था। यहां एक-दो नहीं, बल्कि 700 से अधिक क्षत्राणियों ने जौहर किया था। इतिहास के पन्नों और गया गजेटियर में भी बिहार के रेवाईगढ़ के क्षत्राणियों के जौहर का जिक्र है।

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बिहार का ‘चित्तौड़गढ़’ रेवाई गढ़, 14वीं शताब्दी में हुआ था जौहर

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में क्षत्राणियों के जौहर करने का जिक्र विस्तृत रूप से मिलता है। इतिहास के पन्नों में प्रमुखता से इसका जिक्र है, किंतु बिहार के मगध के रेवाई गढ भी 14वीं शताब्दी में चित्तौड़गढ़ बना था। तब यहां की एक -दो नहीं, बल्कि 700 क्षत्राणियों ने सामूहिक जौहर किया था। जौहर का अर्थ अपनी गरिमा, सम्मान और धर्म की रक्षा के लिए सामूहिक रूप से अग्निकुंड में आत्मदाह होता है। बिहार के रेवाई गढ़ में हुए जौहर की कहानी का इतिहास जरूर है किंतु इसे इतनी प्रमुखता नहीं दी गई, जिसके कारण इस महत्वपूर्ण स्थल की गौरव की कहानी सिमट कर ही अब तक रही है। वही, इतिहास के पन्नों में रेवाई गढ़ का काफी जिक्र आता है। गया गजेटियर में भी रेवाई गढ के शौर्य की कहानियों का जिक्र मिल जाएगा।

समृद्ध और शौर्य भरे इतिहास को जीवंत करता जौहर मंदिर

गया जी के टिकारी अनुमंडल मुख्यालय से आठ से दस किलोमीटर की दूरी पर स्थित है रेवाई गढ़, यह आज रेवई के नाम से जाना जाता है। कहानी 14वीं शताब्दी से शुरू होती है। राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा पर धार जिला स्थित है, जहां परमार शासक राजा संजीव सिंह परमार का शासन हुआ करता था। संजीव सिंह परमार के शासन पर मुस्लिम शासको ने कब्जा जमा लिया। मुस्लिम शासकों का परमार राजा पर कब्जे के बाद इस वंश के रघुवंश सिंह हाङा ने बिहार के गया के रेवाई गढ में दुर्ग की स्थापना की। वर्तमान में इसका का नाम रेवाई है। 14वीं शताब्दी में इसे रेवाई गढ़ के नाम से जाना जाता था।

मुस्लिम आक्रांताओं ने लश्गरगंज में डाला था डेरा, रेवाईगढ़ पर की थी चढ़ाई 

परमार वंशीय रघुवंश सिंह हाड़ा ने यहां अपने साम्राज्य का विस्तार किया, किंतु यहां भी मुस्लिम शासक अपने साम्राज्य का विस्तार करते हुए आ पहुंचे। तुर्क तुगलक वंश के मुस्लिम आक्रांताओं ने इस दौरान लश्गरगंज में सेना का ठहराव किया और फिर रेवाई गढ पर हमला कर दिया। इस हमले में रघुवंश सिंह हाड़ा की पराजय हुई थी और वे वीरगति को प्राप्त हो गए थे। भारी संख्या में सेना, सेनापति, मंत्री आदि के वीरगति होने और पराजय होने के बाद गया के रेवाई गढ़ किले में हाहाकार मच गया था। हालांकि, इस स्थिति में यहां की क्षत्राणियों ने अपना साहस नहीं खोया और अंत समय जान कर जौहर की बलि बेदी परअपने प्राण उत्सर्ग कर दिये।

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आशीष कुमार की रिपोर्ट

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