पटना Zoo में तपती धूप से जानवरों को राहत के लिए लगे AC-कूलर, खानपान भी बदला

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पटना Zoo में तपती धूप से जानवरों को राहत के लिए लगे AC-कूलर, खानपान भी बदला
पटना Zoo में तपती धूप से जानवरों को राहत के लिए लगे AC-कूलर, खानपान भी बदला
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पटना : भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान से जहां आम लोग परेशान हैं, वहीं पटना जू में वन्यजीवों को राहत देने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। जू प्रशासन ने गर्मी से बचाव के लिए न सिर्फ एसी, कूलर और स्प्रिंकलर लगा रखे हैं, बल्कि पिछले कुछ दिनों में इनकी संख्या में भी बढ़ोतरी की गई है। साथ ही जानवरों के खानपान में भी बदलाव किए गए हैं।

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गर्मी के प्रति अधिक संवेदनशील वन्यजीवों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है – जू प्रशासन

जू प्रशासन के अनुसार, गर्मी के प्रति अधिक संवेदनशील वन्यजीवों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शेर, बाघ, तेंदुआ, लकड़बग्घा, छोटी बिल्ली, हिमालयन भालू, स्लॉथ बियर, चिम्पांजी और हूलॉक गिब्बन जैसे वन्यजीवों के नाइट हॉउस में कुल 17 कूलर और 53 पंखों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा भालू और बाघ जैसे जानवरों के शरीर पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जा रहा है ताकि उन्हें गर्मी से राहत मिल सके।

मछलीघर में 11 एयर कंडीशनर लगाए गए हैं, जबकि पक्षी केज और हिरण प्रजाति के बाड़ों में मिस्ट फॉगर और स्प्रिंकलर लगाए गए हैं

मछलीघर में 11 एयर कंडीशनर लगाए गए हैं, जबकि पक्षी केज और हिरण प्रजाति के बाड़ों में मिस्ट फॉगर और स्प्रिंकलर लगाए गए हैं। एमू, ऑस्ट्रिच और भालू के बाड़ों में फाउंटेन की व्यवस्था की गई है। हाथियों के लिए स्प्रिंकलर और लगातार ठंडे पानी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, वहीं गैंडों के लिए अतिरिक्त जलकुंड तैयार किए गए हैं। सरीसृप प्रजाति के जीवों जैसे अजगर, कोबरा, वाइपर और धामीन के सेल में फर्श को लगातार नम रखा जा रहा है।

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गर्मी को देखते हुए वन्यजीवों के भोजन में भी बदलाव किया गया है

गर्मी को देखते हुए वन्यजीवों के भोजन में भी बदलाव किया गया है। मांसाहारी जानवरों को अपच से बचाने के लिए भोजन की मात्रा थोड़ी कम की गई है, जबकि उनके पेयजल में डायरेस्ट, ग्लूकॉन-डी और इलेक्ट्रॉल मिलाया जा रहा है। चिंपांजी को नारियल पानी, तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, केला, दही-भात और विभिन्न फलों के रस दिए जा रहे हैं। भालुओं को तरबूज, केले के थम्ब और बर्फ की सिल्ली उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा घड़ियाल और मगरमच्छों के आहार में वृद्धि की गई है। सभी शाकाहारी और मांसाहारी वन्यजीवों को ग्लूकोज व लू से बचाव के लिए दवाएं भी दी जा रही हैं।

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