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Chandil Murder Case: High Court ने फांसी की सजा रद्द की, 5 लोगों की हत्या मामले में आरोपी को राहत

सीबीएसई ने नई शिक्षा नीति 2020 के तहत 9वीं और 10वीं कक्षा में तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया। तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।


Chandil Murder Case रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2019 के चर्चित चांडिल सामूहिक हत्याकांड मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दोषी करार दिए गए आरोपी की फांसी की सजा रद्द कर दी है। अदालत ने निचली अदालत के दोषसिद्धि और मृत्युदंड संबंधी आदेश को निरस्त करते हुए आरोपी चुन्नू मांझी उर्फ पुटरू की अपील स्वीकार कर ली।

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि आरोपी किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए। यह मामला पति-पत्नी और उनके तीन बच्चों की हत्या से जुड़ा था, जिसने उस समय पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था।

Chandil Murder Case: निचली अदालत ने सुनाई थी फांसी की सजा

चांडिल के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 23 सितंबर 2025 को आरोपी को दोषी ठहराया था और 25 सितंबर 2025 को उसे फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद दोषसिद्धि और मृत्युदंड की पुष्टि को लेकर राज्य सरकार तथा आरोपी की ओर से हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी।

मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है।


Key Highlights:

  • सीबीएसई स्कूलों में 9वीं और 10वीं कक्षा के लिए तीन भाषाएं अनिवार्य।

  • तीन भाषाओं में कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी।

  • तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।

  • तीसरी भाषा का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाएगा।

  • नई व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और एनसीएफ-2023 के तहत लागू।


Chandil Murder Case:आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर सका अभियोजन

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आपराधिक मामलों में दोष सिद्ध करने के लिए आरोपों का संदेह से परे साबित होना आवश्यक है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यदि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दो संभावनाएं बनती हैं तो आरोपी के पक्ष वाली संभावना को स्वीकार किया जाना चाहिए।

अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को निर्विवाद रूप से साबित करने में सफल नहीं रहा। इसलिए आरोपी को संदेह का लाभ दिया जाना न्यायसंगत है।

Chandil Murder Case:जांच और साक्ष्यों में मिले कई विरोधाभास

फैसले में हाईकोर्ट ने जांच प्रक्रिया और साक्ष्यों में कई महत्वपूर्ण खामियों की ओर भी संकेत किया। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी की गवाही और पंचनामा रिपोर्ट में घटनास्थल को लेकर विरोधाभास है।

जांच अधिकारी ने अदालत में बताया था कि मृतकों के शव एक कमरे से बरामद किए गए थे, जबकि पंचनामा रिपोर्ट में शवों के आंगन से बरामद होने का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा जब्त की गई तीन कुल्हाड़ियों की जब्ती सूची में कहीं भी खून के धब्बों का उल्लेख नहीं किया गया, जबकि जांच अधिकारी ने अदालत में दावा किया था कि आरोपी के हाथ में खून से सनी कुल्हाड़ी थी।

हाईकोर्ट ने माना कि इस प्रकार के गंभीर विरोधाभास मामले की विश्वसनीयता को प्रभावित करते हैं। इन्हीं आधारों पर अदालत ने निचली अदालत के आदेश को निरस्त करते हुए आरोपी को राहत प्रदान की।

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