झारखंड हाईकोर्ट ने पाकुड़ एसपी अमरजीत बलिहार हत्या मामले में दो दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदला. ट्रायल कोर्ट की दोषसिद्धि बरकरार रखी.
Pakur SP Amarjeet Balihaar Murder Case रांची: पाकुड़ के तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार की हत्या से जुड़े बहुचर्चित नक्सल मामले में झारखंड हाईकोर्ट की एकल पीठ ने अपना महत्वपूर्ण फैसला सुना दिया है। जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की अदालत ने फांसी की सजा पाए दो दोषियों — सुखलाल उर्फ प्रवीर मुर्मू और सनातन बास्की उर्फ ताला दा — की सजा को संशोधित करते हुए उम्रकैद में बदल दिया। साथ ही दोनों पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर तीन-तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अदालत ने स्पष्ट कहा कि डेथ रेफरेंस नंबर 04/2018 का जवाब “नहीं” में दिया जाता है और इसे खारिज किया जाता है। यानी फांसी की सजा को बरकरार रखने का आधार पर्याप्त नहीं पाया गया। हालांकि, जस्टिस चौधरी की पीठ ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई दोषसिद्धि को कायम रखा है और उसके फैसले में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया।
Key Highlights
झारखंड हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सुखलाल उर्फ प्रवीर मुर्मू और सनातन बास्की की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदला.
पहले खंडपीठ के दो जजों ने इस मामले में विपरीत निर्णय दिया था.
कोर्ट ने दोनों दोषियों पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया, न देने पर तीन महीने अतिरिक्त सजा.
ट्रायल कोर्ट की दोषसिद्धि बरकरार, सिर्फ सजा को कम किया गया.
2013 में नक्सली हमले में पाकुड़ के तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार समेत छह पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी.
जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की पीठ ने अपीलें खारिज करते हुए डेथ रेफरेंस को “नहीं” में जवाब दिया.
Pakur SP Amarjeet Balihaar Murder Case: खंडपीठ के निर्णय में था मतभेद
इस मामले में पहले झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ दो अलग-अलग राय दे चुकी थी। जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय ने दोनों दोषियों को फांसी की सजा से बरी करने का आदेश दिया था, जबकि जस्टिस संजय प्रसाद ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई फांसी की सजा को सही ठहराया था। मतभेद के बाद मामला एकल पीठ को भेजा गया, जिसका अंतिम निर्णय अब सामने आया है।
यह भी उल्लेखनीय है कि अपील की सुनवाई 11 नवंबर 2025 को पूरी हो गई थी और फैसला सुरक्षित रखा गया था। अब एकल पीठ का निर्णय खंडपीठ के दो फैसलों में से जिससे मेल खाता है, वही बहुमत का निर्णय माना जाएगा।
Pakur SP Amarjeet Balihaar Murder Case: कौन सा मामला था?
दो जुलाई 2013 को दुमका जिले में नक्सलियों ने पुलिस दल पर घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में पाकुड़ के तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार, मनोज हेंब्रम, चंदन कुमार थापा, राजीव कुमार शर्मा, ड्राइवर अशोक कुमार श्रीवास्तव और संतोष कुमार मंडल की मौत हो गई थी। घटना को पुलिस ने जघन्यतम अपराध माना और जांच के बाद चार आरोप पत्र दायर किए गए।
मामले में दो नक्सलियों — सुखलाल और सनातन बास्की — को गिरफ्तार किया गया था और दुमका के विशेष न्यायाधीश हसन की अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई थी। पांच अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था।
राज्य सरकार ने भी ट्रायल कोर्ट की ओर से दी गई फांसी की सजा को कन्फर्म करने के लिए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर आगे चलकर खंडपीठ में भिन्न-भिन्न निर्णय आया। अब एकल पीठ ने अंतिम रूप से सजा को उम्रकैद में बदलने का आदेश दिया है।
Pakur SP Amarjeet Balihaar Murder Case: सजा में बदलाव, दोषसिद्धि बरकरार
कोर्ट ने कहा कि अपराध गंभीर है, लेकिन रिकॉर्ड और परिस्थितियों के आधार पर फांसी जैसी अंतिम सजा अनिवार्य नहीं ठहरती। इसलिए सजा को उम्रकैद में बदलते हुए दोनों की अपील को खारिज कर दिया गया है।
इस फैसले के बाद अब दोनों दोषी उम्रकैद की बाकी सजा जेल में काटेंगे, जबकि ट्रायल कोर्ट की ओर से तय दोष सिद्धि पहले की तरह लागू रहेगी।
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