HAM Bokaro Visit: हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर हाल ही में नियुक्त हुए हरे कृष्ण महाराज का बोकारो पहुंचने पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया। जिला सचिव सहदेव मंडल के नेतृत्व में आयोजित इस स्वागत समारोह में बड़ी संख्या में पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। स्वागत समारोह के बाद, प्रदेश अध्यक्ष ने कई इलाकों का दौरा किया, लोगों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली।
जनसेवा को दी गई सर्वोच्च प्राथमिकता
जनसंपर्क अभियान के दौरान, हरे कृष्ण महाराज ने कहा कि समाज और देश की सेवा करना उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य रहा है। उन्होंने बताया कि भारतीय वायु सेना में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सेवा को प्राथमिकता दी थी और वे अपने राजनीतिक जीवन में भी उसी भावना के साथ लोगों के बीच काम करना चाहते हैं।
‘ओपन डोर पॉलिसी’ की घोषणा
प्रदेश अध्यक्ष ने ‘ओपन डोर पॉलिसी’ (खुले दरवाजे की नीति) में अपना विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि पार्टी का कोई भी कार्यकर्ता और राज्य का कोई भी नागरिक अपनी समस्याएं सीधे उनके सामने रख सकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पार्टी जनहित से जुड़े मुद्दों को जोर-शोर से उठाएगी और जरूरत पड़ने पर उनके समाधान के लिए लोकतांत्रिक जन-आंदोलन भी शुरू करेगी।
पेयजल संकट पर चिंता
बोकारो के विभिन्न इलाकों के दौरे के दौरान, प्रदेश अध्यक्ष ने पेयजल संकट को एक बड़ी समस्या के रूप में चिह्नित किया। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही जिला प्रशासन से मिलकर इसके प्रभावी समाधान की मांग करेंगे, ताकि निवासियों को राहत मिल सके।
बंद पड़े पंप हाउस का निरीक्षण
निरीक्षण के क्रम में, उन्होंने बगीचा टोला स्थित एक पंप हाउस का दौरा किया। खबरों के अनुसार, मोटर खराब होने के कारण यह सुविधा लंबे समय से बंद पड़ी है, जिससे स्थानीय निवासियों को पेयजल की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से आवश्यक कार्रवाई करने और ऐसी योजनाओं को तुरंत फिर से शुरू करने का आग्रह किया।

पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह
प्रदेश अध्यक्ष के बोकारो दौरे से पार्टी कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह देखा गया। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में संगठन जनहित के मुद्दों को और अधिक प्रभावी ढंग से उठाएगा और राज्य में संगठनात्मक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

यह भी पढ़ें: Dhanbad Royalty Rule: रॉयल्टी चालान के नए नियम पर बवाल, आखिर क्यों टेंडर प्रक्रिया से दूर हुए संवेदक?
Highlights


















