बिहार में 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 मनाया जाएगा। आईसीडीएस ने जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान और छह माह तक केवल मां का दूध देने पर जोर दिया।
World Breastfeeding Week 2026 पटना: विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 के सफल आयोजन को लेकर बिहार के समाज कल्याण विभाग के समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) निदेशालय ने शुक्रवार को पटना में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की। इस दौरान पोषण ट्रैकर आधारित बाल पोषण संकेतकों की समीक्षा, सेवाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति पर विस्तृत चर्चा की गई। राज्यभर में 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
World Breastfeeding Week 2026:जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराने पर जोर
आईसीडीएस निदेशक डॉ. प्रीति ने कहा कि विश्व स्तनपान सप्ताह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मजबूत बनाने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने सभी जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। परिवारों को यह संदेश दिया जाए कि नवजात शिशु को जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराया जाए, जन्म से पहले छह माह तक केवल मां का दूध दिया जाए और इसके बाद पूरक आहार के साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखा जाए।
Key Highlights
बिहार में 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 का आयोजन होगा।
जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान कराने की अपील।
पहले छह माह तक केवल मां का दूध देने पर विशेष जोर।
पोषण ट्रैकर की प्रभावी मॉनिटरिंग और डेटा की शुद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश।
सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
World Breastfeeding Week 2026:पोषण ट्रैकर की मॉनिटरिंग और डेटा गुणवत्ता पर विशेष फोकस
कार्यशाला में पोषण ट्रैकर की उपयोगिता पर विशेष जोर दिया गया। डॉ. प्रीति ने कहा कि केवल आंकड़े दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उपलब्ध डेटा का विश्लेषण कर समयबद्ध सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करना भी जरूरी है। पोषण ट्रैकर, सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत विकसित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, बच्चों और किशोरियों को मिलने वाली सेवाओं की रियल-टाइम निगरानी की जाती है।
उन्होंने एफआरएस, एचसीएम टिक-मार्क, टीएचआर वितरण, नॉमिनी सुविधा और पोषण ट्रैकर पर दर्ज आंकड़ों की शत-प्रतिशत पारदर्शी निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही कार्यक्रम संकेतकों की नियमित समीक्षा कर सेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने और कुपोषण-मुक्त बिहार के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
World Breastfeeding Week 2026:एफआरएस, एसएएम और मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर हुई विस्तृत चर्चा
कार्यशाला में एफआरएस, गर्भावस्था, बाल्यावस्था, पंखुड़ी, सीआरएस तथा अति कुपोषित (एसएएम) बच्चों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने पोषण ट्रैकर में समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण डेटा प्रविष्टि, पोषण सेवाओं की निगरानी तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने के उपाय साझा किए।
इस अवसर पर संयुक्त निदेशक भारती प्रियंवदा, सहायक निदेशक रचना सिन्हा, सहायक निदेशक माला कुमारी, प्रशिक्षण पदाधिकारी जया मिश्रा, यूनिसेफ की पोषण अधिकारी डॉ. शिवानी दर सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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