झारखंड के नगर निकायों में मंगलवार से प्रॉपर्टी टैक्स, वाटर यूजर चार्ज और ट्रेड लाइसेंस फीस की वसूली ठप हो जायेगी। करीब 2500 कर्मचारी प्रभावित होंगे।
Jharkhand Property Tax रांची:रांची नगर निगम समेत राज्यभर के सभी नगर निकायों में मंगलवार से प्रॉपर्टी टैक्स, वाटर यूजर चार्ज और ट्रेड लाइसेंस फीस की वसूली का काम प्रभावित होने जा रहा है। राज्य शहरी विकास अभिकरण यानी सूडा ने राजस्व संग्रह का काम कर रही श्री पब्लिकेशन एंड स्टेशनर्स, रितिका और स्पैरो एजेंसियों का एग्रीमेंट रद्द कर दिया है। सूडा निदेशक सूरज कुमार ने सोमवार को टैक्स कलेक्शन एजेंसियों के साथ हुए एग्रीमेंट को समाप्त करने का आदेश जारी किया। इन एजेंसियों का मूल एग्रीमेंट 2026 में ही खत्म हो गया था, लेकिन नई एजेंसी के चयन तक उन्हें काम जारी रखने के लिए एक्सटेंशन दिया गया था।
Jharkhand Property Tax: नई एजेंसी का चयन नहीं, निकाय करेंगे टैक्स वसूली
सबसे अहम बात यह है कि सूडा ने अब तक नई टैक्स कलेक्शन एजेंसी का चयन नहीं किया है। इसके बावजूद पुरानी एजेंसियों को काम से हटा दिया गया है। सूडा निदेशक की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि अब टैक्स कलेक्शन का काम संबंधित नगर निकायों द्वारा ही कराया जायेगा। नई व्यवस्था लागू होने से आम लोगों को प्रॉपर्टी टैक्स, वाटर यूजर चार्ज और ट्रेड लाइसेंस फीस जमा करने में परेशानी हो सकती है। नगर निकायों के सामने भी राजस्व संग्रह की व्यवस्था को तत्काल संभालने की चुनौती होगी।
Key Highlights
मंगलवार से झारखंड के नगर निकायों में टैक्स वसूली का काम ठप होने की स्थिति।
सूडा ने तीन टैक्स कलेक्शन एजेंसियों का एग्रीमेंट रद्द कर दिया।
नई एजेंसी का चयन अभी तक नहीं हुआ है।
करीब 2500 टैक्स कलेक्टरों के बेरोजगार होने की बात सामने आयी है।
नई व्यवस्था में दोबारा प्रॉपर्टी मैपिंग करने की जरूरत पड़ सकती है।
Jharkhand Property Tax: 2500 कर्मचारी बेरोजगार, दोबारा होगी प्रॉपर्टी मैपिंग
टैक्स कलेक्शन एजेंसियों के हटने से करीब 2500 लोगों के रोजगार पर असर पड़ा है। इन एजेंसियों के साथ काम कर रहे टैक्स कलेक्टर कई वर्षों से अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यरत थे। उन्हें इलाके की प्रॉपर्टी, उसके क्षेत्रफल और संबंधित करदाताओं की जानकारी थी। नई व्यवस्था में पुराने टैक्स कलेक्टरों की जगह नई टीम आने पर एक बार फिर घरों और प्रॉपर्टी की मैपिंग करने की जरूरत पड़ सकती है। इससे टैक्स वसूली की प्रक्रिया प्रभावित होने के साथ नगर निकायों के राजस्व संग्रह पर भी असर पड़ने की आशंका है।


















