Jharkhand Revenue Collection: झारखंड में राजस्व संग्रह को लेकर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने शुक्रवार को सरकार की स्थिति और आगामी लक्ष्य को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य ने अब तक निर्धारित कुल राजस्व लक्ष्य का करीब 36 प्रतिशत संग्रह किया है और फिलहाल सरकार लक्ष्य से लगभग 6 प्रतिशत पीछे चल रही है। हालांकि, वित्त मंत्री ने मौजूदा स्थिति को लेकर भरोसा जताते हुए कहा कि नवंबर में होने वाली अगली समीक्षा तक राज्य निर्धारित लक्ष्य से अधिक राजस्व हासिल करने की स्थिति में होगा। उन्होंने अधिकारियों से राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए व्यक्तिगत इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता के साथ काम करने का आह्वान किया।
राजस्व कैलेंडर के लक्ष्य को हर हाल में हासिल करने का निर्देश
वित्त मंत्री ने अधिकारियों को राजस्व कैलेंडर में निर्धारित लक्ष्यों पर गंभीरता से काम करने को कहा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि लक्ष्य हासिल करने के लिए केवल औपचारिक प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता के साथ काम करना होगा। मंत्री ने अधिकारियों के बीच राजस्व संग्रह को लेकर अंदर से जुनून पैदा करने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना है कि निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने के लिए विभागीय स्तर पर लगातार निगरानी और सक्रिय प्रयास जरूरी हैं।
केंद्र की नीतियों से 22 हजार करोड़ के नुकसान का दावा
राजस्व संग्रह की समीक्षा के दौरान वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार की कुछ नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण झारखंड को सालाना करीब 22 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। राधाकृष्ण किशोर के अनुसार, इसमें करीब 4 हजार करोड़ रुपये जी राम जी योजना, लगभग 14 हजार करोड़ रुपये MMDR Amendment Bill और करीब 4 हजार करोड़ रुपये GST Rationalisation से संबंधित नुकसान शामिल है। हालांकि, ये आंकड़े वित्त मंत्री की ओर से किए गए दावे हैं। इस संबंध में केंद्र सरकार का पक्ष इस सामग्री में उपलब्ध नहीं है।
केंद्र से आर्थिक सहयोग को लेकर भी उठाए सवाल
वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार की वित्तीय स्थिति को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि या तो केंद्र सरकार की अपनी आर्थिक स्थिति खराब है या फिर गैर-भाजपा शासित राज्य होने के कारण झारखंड को अपेक्षित आर्थिक सहयोग नहीं मिल रहा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया। मंत्री ने कहा कि यदि झारखंड आर्थिक रूप से मजबूत है तो राज्य को केंद्र सरकार से राशि की मांग करने की आवश्यकता क्यों पड़ेगी। वहीं, उन्होंने राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर भरोसा जताते हुए कहा कि झारखंड कमजोर राज्य नहीं है और सरकार अपनी योजनाओं से जुड़े आर्थिक दायित्वों को पूरा करेगी।
फर्जी GST और अवैध कोयला परिवहन पर सख्ती
राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए राज्य का वाणिज्य-कर विभाग टैक्स चोरी के खिलाफ कार्रवाई तेज करेगा। वित्त मंत्री ने फर्जी GST रजिस्ट्रेशन, GST चोरी और अवैध कोयला परिवहन पर सख्त रुख अपनाने की बात कही। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि टैक्स चोरी को हर हाल में रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। सरकार का जोर राजस्व के मौजूदा स्रोतों को मजबूत करने के साथ कर चोरी पर नियंत्रण करने पर है।
60 हजार करोड़ से बढ़ाकर एक लाख करोड़ राजस्व का लक्ष्य
वित्त मंत्री के अनुसार, राज्य सरकार का स्टेट ऑन-टैक्स रेवेन्यू और नॉन-टैक्स रेवेन्यू मिलाकर करीब 60 हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य है। इसके साथ ही सरकार की दीर्घकालिक महत्वाकांक्षा राजस्व संग्रह को बढ़ाकर एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने की है। ऐसे में सरकार के सामने GST संग्रह में गिरावट, कर चोरी पर नियंत्रण और राजस्व कैलेंडर के लक्ष्यों को पूरा करने की चुनौती है। नवंबर में होने वाली अगली समीक्षा बैठक इस लिहाज से महत्वपूर्ण होगी। इसी समीक्षा में राजस्व संग्रह की प्रगति और सरकार के लक्ष्य तक पहुंचने की स्थिति का आकलन किया जाएगा।



















