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Ranchi RIMS-2: 2800 बेड के रिम्स-2 को लेकर बड़ी तैयारी, पर्यावरण मंजूरी के लिए कंसल्टेंट नियुक्त करेगा विभाग

रांची के कांके-नगड़ी क्षेत्र में 2800 बेड के रिम्स-2 मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के निर्माण के लिए विभाग पर्यावरण मंजूरी हेतु विशेषज्ञ कंसल्टेंट नियुक्त करेगा।

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Ranchi RIMS-2: राजधानी रांची के कांके-नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित 2800 बेड के ‘रिम्स-2’ मल्टी स्पेशियलिटी टीचिंग हॉस्पिटल सह मेडिकल कॉलेज के निर्माण को लेकर प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। करीब 2514 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के भौतिक निर्माण कार्य से पहले पर्यावरण मंजूरी लेने की तैयारी तेज कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग और झारखंड स्टेट बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCCL) की ओर से पर्यावरण से जुड़ी आवश्यक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके लिए विशेषज्ञ कंसल्टेंट की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है।

Ranchi RIMS-2: पर्यावरण मंजूरी के लिए नियुक्त होगा विशेषज्ञ कंसल्टेंट

JSBCCL ने रिम्स-2 परियोजना के लिए कंसल्टेंट के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए इच्छुक एजेंसियों से आवेदन मांगे गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सितंबर 2026 के अंत तक कंसल्टेंट के चयन की प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। चयनित कंसल्टेंट की जिम्मेदारी परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन करने और उससे संबंधित रिपोर्ट तैयार करने की होगी। इसके साथ ही पर्यावरण मंजूरी के लिए जरूरी प्रक्रियाओं और अनुमतियों को पूरा कराने में भी कंसल्टेंट की भूमिका होगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य निर्माण कार्य शुरू होने से पहले पर्यावरण से संबंधित आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करना है।

टेंडर प्रक्रिया पहले ही हो चुकी है

नगड़ी में प्रस्तावित अस्पताल सह मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पहले ही की जा चुकी है। अब कार्य आवंटन से पहले पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों और इंजीनियरों का मानना है कि पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया में समय लग सकता है। ऐसे में निर्माण कार्य के लिए आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ पर्यावरणीय औपचारिकताओं को भी समानांतर रूप से पूरा करने की कोशिश की जा रही है। इससे कार्य आवंटन के बाद निर्माण शुरू करने की प्रक्रिया में पर्यावरण मंजूरी से संबंधित संभावित देरी को कम करने में मदद मिल सकती है।

निर्माण शुरू होने से पहले बाधाएं दूर करने की कोशिश

रिम्स-2 को बड़े अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित करने की योजना है। परियोजना का निर्माण शुरू करने से पहले जरूरी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन और पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई है। कंसल्टेंट के चयन के बाद परियोजना से संबंधित पर्यावरणीय पहलुओं का विस्तृत अध्ययन आगे बढ़ेगा। प्रशासनिक स्तर पर कोशिश है कि परियोजना से जुड़ी आवश्यक मंजूरियां समय रहते पूरी हो जाएं, ताकि आगे निर्माण कार्य को गति देने में अनावश्यक बाधाएं सामने न आएं।

टेंडर के बाद तेजी से काम शुरू कराने की तैयारी

करीब 2514 करोड़ रुपये की प्रस्तावित लागत और 2800 बेड की क्षमता वाला रिम्स-2 रांची में स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं में शामिल है। फिलहाल इसका भौतिक निर्माण कार्य शुरू होने से पहले पर्यावरण मंजूरी की दिशा में प्रक्रिया चल रही है। सितंबर के अंत तक कंसल्टेंट के चयन के बाद पर्यावरणीय अध्ययन और संबंधित मंजूरियों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। विभाग की तैयारी है कि टेंडर और कार्य आवंटन से जुड़ी प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू करने में पर्यावरणीय मंजूरी को लेकर किसी तरह की प्रशासनिक अड़चन न रहे। फिलहाल परियोजना के निर्माण की अगली गति पर्यावरण मंजूरी और अन्य आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं के पूरा होने पर निर्भर करेगी।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रिम्स-2 परियोजना की क्या विशेषताएं हैं?

रिम्स-2 एक मल्टी स्पेशियलिटी टीचिंग हॉस्पिटल सह मेडिकल कॉलेज है जिसमें 2800 बेड की क्षमता होगी और इसकी लागत करीब 2514 करोड़ रुपये है। यह रांची के कांके-नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित है।

विशेषज्ञ कंसल्टेंट को नियुक्त करने का मुख्य उद्देश्य क्या है?

कंसल्टेंट की जिम्मेदारी परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन करने, संबंधित रिपोर्ट तैयार करने और पर्यावरण मंजूरी के लिए जरूरी प्रक्रियाओं व अनुमतियों को पूरा कराने की होगी।

कंसल्टेंट के चयन के लिए कितना समय निर्धारित किया गया है?

सितंबर 2026 के अंत तक कंसल्टेंट के चयन की प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

क्या टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है?

हां, रिम्स-2 के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है। अब कार्य आवंटन से पहले पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।

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