नामकुम अंचल के म्यूटेशन मामले में गिरफ्तार पूर्व CI मनोज कुमार दीक्षित और लिपिक दीपक कुमार ने दस्तावेज गायब होने का आरोप कर्मचारी महली पर लगाया है।
Ranchi Mutation Scam : नामकुम अंचल कार्यालय से दाखिल-खारिज यानी म्यूटेशन से जुड़े अहम दस्तावेज गायब होने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी ACB की जांच आगे बढ़ रही है। गिरफ्तार तत्कालीन अंचल निरीक्षक मनोज कुमार दीक्षित और तत्कालीन लिपिक दीपक कुमार ने पूछताछ में दस्तावेज गायब होने की जिम्मेदारी अंचल के एक अन्य कर्मचारी महली पर डालने की कोशिश की है।
एसीबी के अनुसार दोनों आरोपियों के जवाब संतोषजनक नहीं रहे हैं। एजेंसी अब दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर आमने-सामने पूछताछ करने की तैयारी में है, ताकि दस्तावेजों की पूरी मूवमेंट चेन और कथित फर्जीवाड़े में उनकी भूमिका स्पष्ट की जा सके।
Ranchi Mutation Scam: पूछताछ में एक-दूसरे से अलग नहीं हो सके आरोपी
एसीबी की पूछताछ के दौरान मनोज कुमार दीक्षित और दीपक कुमार ने दावा किया कि जमीन से संबंधित मूल फाइल और दस्तावेज कर्मचारी महली को सौंपे गये थे। दोनों के अनुसार फाइल वहीं से गायब हुई।
जांच अधिकारियों ने जब फाइल सौंपे जाने की तारीख, हैंडओवर के समय मौजूद लोगों और उसके बाद फाइल की निगरानी की जिम्मेदारी से जुड़े सवाल पूछे, तो दोनों आरोपी ठोस जानकारी नहीं दे सके। अब एसीबी रिमांड के दौरान फाइलों की आवाजाही से जुड़े रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच करेगी।
Ranchi Mutation Scam: हाईकोर्ट के निर्देश के बाद दर्ज हुआ था केस
यह मामला नामकुम अंचल के दाखिल-खारिज वाद संख्या 356आर-27/2013-14 से जुड़ा है। झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश के बाद एसीबी रांची थाने में 26 अगस्त 2026 को कांड संख्या 18/2026 दर्ज किया गया था।
प्रारंभिक जांच में तत्कालीन अंचल अधिकारी डॉ. श्वेता वर्मा, तत्कालीन सीआई मनोज कुमार दीक्षित और लिपिक दीपक कुमार की भूमिका से जुड़े साक्ष्य सामने आने की बात कही गयी है। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई की गयी।
Ranchi Mutation Scam: 1.22 एकड़ जमीन पर निजी कंपनी के नाम जमाबंदी का आरोप
मामले की जड़ें धुर्वा थाना क्षेत्र के डुंडू गांव की जमीन से जुड़ी हैं। शिकायत के अनुसार खाता नंबर 32 के प्लॉट नंबर 776, 820, 821 और 822 की कुल 1.22 एकड़ जमीन को लेकर विवाद है।
शिकायत में कहा गया है कि मूल रैयत की मां ने वर्ष 1978-79 में निबंधन संख्या 23आर के तहत 5.93 एकड़ जमीन खरीदी थी। पारिवारिक बंटवारे के बाद वैध उत्तराधिकारी जमीन पर दखल-कब्जे में थे।
आरोप है कि बाद में अंचल कार्यालय के स्तर पर रिकॉर्ड में हेरफेर कर करीब दो एकड़ जमीन का अवैध म्यूटेशन और डिमांड खोल दिया गया। इसी क्रम में 1.22 एकड़ जमीन की जमाबंदी प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के नाम कायम किये जाने का आरोप है।
17 अगस्त 2016 को मूल रैयत को दोहरी जमाबंदी से संबंधित नोटिस मिलने के बाद मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद जमीन के रिकॉर्ड और म्यूटेशन प्रक्रिया को लेकर शिकायत सामने आयी। अब एसीबी दस्तावेजों की आवाजाही, रिकॉर्ड में हुए बदलाव और संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है।
Key Highlights
- नामकुम अंचल के म्यूटेशन मामले में ACB की जांच जारी
- तत्कालीन CI मनोज कुमार दीक्षित और लिपिक दीपक कुमार गिरफ्तार
- दोनों ने दस्तावेज गायब होने की जिम्मेदारी कर्मचारी महली पर डाली
- ACB दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर आमने-सामने पूछताछ कर सकती है
- 1.22 एकड़ जमीन पर निजी कंपनी के नाम कथित अवैध जमाबंदी का मामला


















