Lt Col Jai Prakash Bhagirathi Peak, कोडरमा: जब रास्ते में बर्फ की मोटी परत हो, सामने खड़ी चट्टानें हों और हर कदम पर मौसम चुनौती बनकर खड़ा हो, तब मंजिल तक पहुंचना सिर्फ शारीरिक ताकत का नहीं, बल्कि हौसले और नेतृत्व का भी इम्तिहान होता है। भारतीय सेना के एक पर्वतारोहण दल ने ऐसी ही मुश्किल परिस्थितियों के बीच अपनी दृढ़ता दिखाई और 6512 मीटर की ऊंचाई पर तिरंगा फहराकर अभियान को सफल बनाया। इस अभियान का नेतृत्व सैनिक स्कूल तिलैया के पूर्ववर्ती छात्र और भारतीय सेना के पर्वतारोही ले. कर्नल जय प्रकाश कुमार ने किया। उनके नेतृत्व में सेना के 30 सदस्यीय पर्वतारोहण दल ने उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय क्षेत्र में स्थित माउंट भागीरथी पर चढ़ाई की। 22 सितंबर को दल के 28 सदस्य चोटी तक पहुंचे और वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
सतोपंथ से भागीरथी तक बदला अभियान का लक्ष्य
भारतीय सेना का यह दल मूल रूप से 7075 मीटर ऊंची माउंट सतोपंथ चोटी पर अभियान के लिए तैयार किया गया था। 1 अगस्त को 30 सदस्यीय दल का गठन नई दिल्ली में किया गया था, जिसके बाद 20 अगस्त को टीम उत्तराखंड के लिए रवाना हुई। 24 अगस्त को गंगोत्री में बेस कैंप स्थापित किया गया। इसके बाद गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में अभियान को आगे बढ़ाते हुए पांच कैंप तैयार किए गए। टीम को गंगोत्री, चतुरंगी और सुंदर बामक हिमखंडों के बीच से गुजरना पड़ा। इस दौरान लगातार बारिश, बर्फबारी, नदी-नालों और हिमस्खलन जैसे जोखिम अभियान को चुनौती दे रहे थे। करीब 16 हजार फीट की ऊंचाई पर वासुकीताल में मुख्य कैंप बनाया गया। पर्वत पर आगे बढ़ने के लिए लगभग 2000 मीटर रस्सी भी स्थापित की गई।
भारी बर्फबारी के बीच लिया गया बड़ा फैसला
अभियान के दौरान मौसम लगातार चुनौतीपूर्ण बना रहा। भारी बर्फबारी और हिमस्खलन की चेतावनी को देखते हुए ले. कर्नल जय प्रकाश कुमार ने सतोपंथ अभियान को रोकने और माउंट भागीरथी की ओर बढ़ने का फैसला लिया। 21 सितंबर को अंतिम कैंप तैयार किया गया। इसके अगले दिन 22 सितंबर की रात करीब दो बजे दल ने चोटी की ओर अंतिम चढ़ाई शुरू की। लगभग 1200 मीटर की खड़ी और संकरी चढ़ाई टीम के लिए सबसे कठिन चरणों में से एक रही। रास्ते में तेज हवाओं और कड़ाके की ठंड के अलावा बर्फीली दरारों, पत्थर गिरने और लगातार बर्फबारी का सामना करना पड़ा। तमाम चुनौतियों के बीच टीम ने अपनी गति बनाए रखी।
दस घंटे की चढ़ाई के बाद 6512 मीटर पर फहराया तिरंगा
करीब दस घंटे तक चली कठिन चढ़ाई के बाद दोपहर लगभग 12 बजे दल के 28 सदस्य 6512 मीटर ऊंची माउंट भागीरथी चोटी पर पहुंचने में सफल रहे। वहां तिरंगा फहराया गया और अभियान को सफल घोषित किया गया। यह उपलब्धि ले. कर्नल जय प्रकाश कुमार के पर्वतारोहण अनुभव के साथ-साथ पूरी टीम के सामूहिक प्रयास को भी दर्शाती है। भागीरथी अभियान को भारतीय सेना के आगामी बड़े पर्वतारोहण अभियान की तैयारी से भी जोड़ा गया है।
55 से ज्यादा चोटियों पर अभियान का अनुभव
मूल रूप से बोकारो जिले के रहने वाले ले. कर्नल जय प्रकाश कुमार वर्ष 2005 से भारतीय सेना में सेवा दे रहे हैं। उन्होंने 2009 में पर्वतारोहण की शुरुआत की थी और अब तक 55 से अधिक चोटियों पर अभियान कर चुके हैं। उनकी पर्वतारोहण उपलब्धियों में वर्ष 2019 में माउंट एवरेस्ट और वर्ष 2024 में अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो की फतह भी शामिल है। इसके अलावा उन्होंने थालेसागर, कून, नून, देव टिब्बा, जोगिन, शिपकी, कनामो, कुल्लू पूमोरी और कांगयात्से जैसी चोटियों पर भी अभियान का नेतृत्व किया है। पर्वतारोहण और खोज अभियानों में उनके योगदान के लिए उन्हें कई बार सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2021 में उन्हें सेना मेडल मिला था। इसके अलावा उन्हें राष्ट्रपति द्वारा तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार 2020 से भी सम्मानित किया गया।
Everest Massif 2027 की तैयारी में भागीरथी अभियान
ले. कर्नल जय प्रकाश कुमार को भारतीय सेना के प्रस्तावित Everest Massif 2027 अभियान का नेतृत्व सौंपा गया है। इस अभियान के तहत सेना के प्रशिक्षित जवान माउंट एवरेस्ट, ल्होत्से और नुप्तसे चोटियों पर अभियान की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में भागीरथी चोटी का यह अभियान आगामी चुनौती के लिए अभ्यास और तैयारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 6512 मीटर की ऊंचाई पर तिरंगा फहराने वाली इस उपलब्धि ने ले. कर्नल जय प्रकाश कुमार के पर्वतारोहण सफर में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है।
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