Bihar Government School Education: बिहार में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार स्कूलों में डिजिटल सुविधाओं, विज्ञान प्रयोगशालाओं, स्मार्ट बोर्ड और बेहतर आधारभूत संरचना का विस्तार करना चाहती है। इसके लिए केंद्र सरकार से अलग-अलग मदों में अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की ओर से 3,818 ICT लैब के लिए 91.63 करोड़ रुपये और पहले से संचालित 784 ICT लैब के लिए 18.82 करोड़ रुपये की स्वीकृति मांगी गई है। सरकार का जोर स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ विद्यार्थियों के नियमित मूल्यांकन और शिक्षकों की जवाबदेही बढ़ाने पर भी है।
3,818 ICT लैब के लिए 91.63 करोड़ रुपये की मांग
सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा के विस्तार के लिए ICT लैब को महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है। शिक्षा मंत्री ने इन लैब के नियमित संचालन के लिए समय पर राशि उपलब्ध कराने की मांग की है। राशि मिलने से लैब में मौजूद उपकरणों के रखरखाव और तकनीकी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही ICT लैब के संचालन से जुड़े अन्य जरूरी कार्य भी समय पर किए जा सकेंगे। पहले से संचालित 784 ICT लैब के लिए भी 18.82 करोड़ रुपये की स्वीकृति मांगी गई है। इससे मौजूदा डिजिटल सुविधाओं को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने पर जोर रहेगा।
1,275 स्कूलों में विज्ञान प्रयोगशालाओं की तैयारी
डिजिटल शिक्षा के साथ सरकारी स्कूलों में प्रयोगात्मक पढ़ाई को भी मजबूत करने की योजना है। राज्य के 1,275 विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशालाओं के लिए प्रस्तावित वैकल्पिक स्थलों को जल्द मंजूरी देने का अनुरोध किया गया है। मंजूरी मिलने के बाद इन विद्यालयों में विज्ञान विषय की प्रयोगात्मक पढ़ाई के लिए जरूरी आधारभूत संरचना विकसित करने का रास्ता साफ होगा। इससे विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय प्रयोग के माध्यम से सीखने का अवसर मिल सकेगा। वहीं, PM श्री विद्यालयों में 227 अतिरिक्त कक्षाओं के निर्माण की भी तैयारी है। इसके लिए अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है।
स्मार्ट बोर्ड से लेकर शौचालय मरम्मत तक होगा काम
स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी सरकार का फोकस है। योजना के तहत 525 विद्यालयों में खराब शौचालयों की मरम्मत कराई जाएगी। इसके अलावा 836 विद्यालयों में स्मार्ट बोर्ड और इंटरैक्टिव लर्निंग पैनल लगाने की योजना है। इससे कक्षा में पढ़ाई को तकनीक के माध्यम से अधिक इंटरैक्टिव बनाने का प्रयास किया जाएगा। विद्यालयों में विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने के लिए भी अतिरिक्त राशि की मांग की गई है। यानी योजना में केवल डिजिटल शिक्षा ही नहीं, बल्कि स्कूलों की जरूरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
700 मॉडल स्कूल बनेंगे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
राज्य में सरस्वती विद्या निकेतन के नाम से संचालित 700 मॉडल स्कूलों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इन विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था, आधारभूत संरचना और शिक्षण गतिविधियों की निगरानी के लिए प्रत्येक स्कूल में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। नोडल अधिकारी स्कूल को गोद लेकर वहां की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी करेंगे। शिक्षा विभाग ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। मॉडल स्कूलों में विद्यार्थियों के नियमित मूल्यांकन के लिए हर मंगलवार विषयवार टेस्ट लेने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। एक महीने में चार विषयों की परीक्षा होगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की पढ़ाई और तैयारी का लगातार आकलन करना है।
कक्षा में मोबाइल पर रोक, खेल और प्रतियोगिता पर भी जोर
मॉडल स्कूलों में शिक्षकों के कक्षा के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करने पर रोक रहेगी। शिक्षक अपना मोबाइल संदूक में रखकर कक्षा में जाएंगे, ताकि पठन-पाठन के दौरान उनका पूरा ध्यान विद्यार्थियों पर रहे। स्कूलों में विद्यार्थियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा देने की तैयारी है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को क्लास मॉनिटर बनाया जाएगा और उन्हें बैज दिया जाएगा। शिक्षकों के लिए ‘बेस्ट टीचर ऑफ द मंथ’ की पहल भी शुरू की जाएगी। पढ़ाई के साथ खेल गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जाएगा। मॉडल स्कूलों में एथलेटिक्स को बढ़ावा देते हुए दौड़, लंबी कूद और ऊंची कूद जैसी गतिविधियां कराई जाएंगी।
30 सितंबर को होगा मॉडल स्कूलों का निरीक्षण
मॉडल स्कूलों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए 30 सितंबर को अधिकारियों की टीम निरीक्षण करेगी। इस दौरान स्कूलों की आधारभूत संरचना, शैक्षणिक गतिविधियों और अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए चल रहे कोचिंग कार्यक्रमों का भी जायजा लिया जाएगा। इसके अलावा अधिकारियों की ओर से औचक निरीक्षण भी किया जाएगा। सरकार की इन तैयारियों में डिजिटल शिक्षा, विज्ञान की प्रयोगात्मक पढ़ाई, स्मार्ट क्लास, बेहतर आधारभूत सुविधाएं, नियमित मूल्यांकन और खेल गतिविधियों को एक साथ मजबूत करने पर जोर दिखाई दे रहा है। अगर प्रस्तावित राशि और योजनाओं को मंजूरी मिलती है, तो आने वाले समय में सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक और तकनीकी सुविधाओं में विस्तार देखने को मिल सकता है।
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