गयाजी पितृपक्ष महासंगम 2026 में 51 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। विदेशी श्रद्धालुओं की भागीदारी, टेंट सिटी और आधुनिक सुविधाओं ने आयोजन को खास बनाया।
Gaya Pitru Paksha Mela 2026 पटना: बिहार के गयाजी में आयोजित पितृपक्ष महासंगम 2026 का 10 अक्टूबर को समापन हो गया। इस वर्ष देश के विभिन्न हिस्सों से 51 लाख से अधिक श्रद्धालु गयाजी पहुंचे और फल्गु नदी के तट पर अपने पितरों की आत्मा की शांति एवं मोक्ष की कामना के साथ पिंडदान और तर्पण किया। धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और आधुनिक सुविधाओं के संगम के रूप में इस वर्ष का आयोजन कई मायनों में खास रहा। विदेशी श्रद्धालुओं की भागीदारी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिले अवसरों ने भी गयाजी की धार्मिक एवं पर्यटन संबंधी पहचान को नई मजबूती दी।
Gaya Pitru Paksha Mela 2026:पितृपक्ष महासंगम 2026 में 51 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे
गयाजी में पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। कोरोना महामारी के दौरान धार्मिक आयोजन प्रभावित हुआ था, लेकिन इसके बाद श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में 9.15 लाख, 2023 में 26.84 लाख, 2024 में 40.55 लाख और 2025 में 31.87 लाख श्रद्धालु गयाजी पहुंचे थे। वहीं, वर्ष 2026 के पितृपक्ष महासंगम में 51 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन का आंकड़ा सामने आया है।
फल्गु नदी के तट पर पिंडदान, विष्णुपद मंदिर में वैदिक मंत्रों का उच्चारण और विभिन्न धार्मिक स्थलों पर अनुष्ठानों के बीच गयाजी में पूरे पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या ने आवास, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं की जरूरत को भी रेखांकित किया।
Gaya Pitru Paksha Mela 2026:रूस और यूक्रेन समेत कई देशों के श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान
गयाजी की धार्मिक महत्ता अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रही है। पितृपक्ष महासंगम 2026 के दौरान रूस, यूक्रेन, जर्मनी, इटली और लातविया के 22 विदेशी श्रद्धालुओं के एक समूह ने 2 अक्टूबर को फल्गु नदी के देवघाट पर पिंडदान और तर्पण किया।
इस समूह में रूस के छह, जर्मनी के 11, यूक्रेन के दो तथा इटली और लातविया के एक-एक नागरिक शामिल थे। खास बात यह रही कि रूस और यूक्रेन जैसे संघर्षरत देशों के नागरिकों ने एक साथ अपने दिवंगत परिजनों और पूर्वजों की स्मृति में धार्मिक अनुष्ठान किए। फ्रांस और ब्राजील सहित अन्य देशों से भी श्रद्धालुओं के गयाजी पहुंचने की जानकारी सामने आई।
गयाजी की धार्मिक और सांस्कृतिक विशेषता यह भी है कि यहां हिंदू और बौद्ध धर्म से जुड़े प्रमुख तीर्थ स्थल मौजूद हैं। विष्णुपद मंदिर और फल्गु नदी जहां पितृ कर्म के प्रमुख केंद्र हैं, वहीं निकट स्थित बोधगया अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन का महत्वपूर्ण स्थल है। बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर परिसर को वर्ष 2002 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था।
Key Highlights
- गयाजी पितृपक्ष महासंगम 2026 में 51 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का आंकड़ा सामने आया।
- फल्गु नदी के तट पर पिंडदान और तर्पण कर श्रद्धालुओं ने पितरों की शांति एवं मोक्ष की कामना की।
- रूस, यूक्रेन, जर्मनी, इटली और लातविया के 22 विदेशी श्रद्धालुओं ने देवघाट पर धार्मिक अनुष्ठान किए।
- श्रद्धालुओं के लिए 2,500 बिस्तरों की क्षमता वाली टेंट सिटी की व्यवस्था की गई।
- मेले से होटल, परिवहन, खानपान, पूजा सामग्री और स्थानीय व्यापार से जुड़े लोगों को आर्थिक अवसर मिले।
Gaya Pitru Paksha Mela 2026:पितृपक्ष मेले से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला बढ़ावा
पितृपक्ष महासंगम केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि गयाजी की स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से होटल, धर्मशाला, परिवहन, खानपान और पूजा सामग्री की मांग बढ़ जाती है। इससे पारंपरिक पंडा परिवारों, दुकानदारों, फूल-माला विक्रेताओं, ऑटो और ई-रिक्शा चालकों, होटल संचालकों तथा छोटे व्यापारियों को आजीविका के अवसर मिलते हैं।
इस वर्ष गांधी मैदान की टेंट सिटी में जीविका दीदियों द्वारा संचालित रसोई के माध्यम से श्रद्धालुओं को किफायती और सात्विक भोजन उपलब्ध कराया गया। इस तरह मेले ने धार्मिक गतिविधियों के साथ स्थानीय लोगों की आर्थिक भागीदारी को भी बढ़ावा दिया।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ गयाजी में आध्यात्मिक पर्यटन के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। बेहतर प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं के विकास से स्थानीय कारोबार को लंबे समय तक लाभ मिलने की उम्मीद है।
Gaya Pitru Paksha Mela 2026:टेंट सिटी, QR कोड रिस्ट बैंड और AI अनुवाद जैसी सुविधाएं
पितृपक्ष महासंगम 2026 में तीर्थयात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई व्यवस्थाएं की गईं। श्रद्धालुओं के लिए 2,500 बिस्तरों की क्षमता वाली टेंट सिटी तैयार की गई। बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के उद्देश्य से QR कोड आधारित रिस्ट बैंड की व्यवस्था भी की गई।
विदेशी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए AI आधारित भाषा अनुवाद और ई-पिंडदान जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव प्रदान करना और विभिन्न भाषाएं बोलने वाले यात्रियों के लिए सुविधाएं बढ़ाना था।
आवास, परिवहन, स्वच्छ पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं के साथ डिजिटल सेवाओं का महत्व भी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में आधुनिक तकनीक का उपयोग गयाजी में तीर्थयात्रा के अनुभव को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पितृपक्ष महासंगम 2026 का समापन गयाजी की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन क्षमता को सामने लाता है। 51 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की भागीदारी, विदेशी नागरिकों की मौजूदगी, स्थानीय कारोबार को मिले अवसर और आधुनिक सुविधाओं ने इस आयोजन को विशेष पहचान दी। गयाजी एक बार फिर पितरों के प्रति श्रद्धा, पारिवारिक परंपराओं और सांस्कृतिक एकता के प्रमुख केंद्र के रूप में सामने आया।


















