बिहार में जीविका दीदियों के कौशल विकास और रोजगार के नए अवसरों पर पटना में कार्यशाला आयोजित की गई।
Google पर 22Scope चुनेंBihar Care Economy Skill Development: बिहार में जीविका दीदियों के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित करने और महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा देने की दिशा में पहल की जा रही है। इसी उद्देश्य से बुधवार को पटना के लेमन ट्री होटल में ‘बिल्डिंग बिहार्स केयर इकोनॉमी: सर्विसेज, लाइवलीहुड्स एंड पाथवेज टू स्केल’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। जीविका और यूनिसेफ के तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम में सरकारी विभागों, स्वास्थ्य क्षेत्र, सामाजिक संगठनों और उद्यमिता से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला में देखभाल आधारित अर्थव्यवस्था यानी केयर इकोनॉमी के विस्तार, रोजगार सृजन, महिलाओं के कौशल विकास और ग्रामीण स्तर पर नए उद्यमों की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसका प्रमुख उद्देश्य देखभाल सेवाओं को सामाजिक कल्याण, महिला सशक्तिकरण और नियमित आय के अवसरों से जोड़ना था।
प्रशिक्षण और प्रमाणन से बढ़ेगी जीविका दीदियों की क्षमता
कार्यक्रम का उद्घाटन राजस्व परिषद बिहार की अध्यक्ष-सह-सदस्य हरजोत कौर बम्हरा, ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव एचआर श्रीनिवासन और जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हिमांशु शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। प्रारंभिक सत्र में हिमांशु शर्मा ने कार्यशाला के उद्देश्यों और अपेक्षित परिणामों की जानकारी दी। वहीं, यूनिसेफ बिहार की चीफ ऑफ फील्ड ऑफिसर प्रभारी मोना सिन्हा ने केयर इकोनॉमी को सामाजिक नीति, लैंगिक समानता और रोजगार सृजन से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव एचआर श्रीनिवासन ने कहा कि जीविका दीदियों की भूमिका को केवल अनौपचारिक देखभाल तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि इच्छुक महिलाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण और प्रमाणन दिया जाए। साथ ही स्थानीय एवं विदेशी भाषाओं का ज्ञान और पेशेवर कौशल विकसित करने पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि वे बेहतर रोजगार हासिल कर सकें और उनकी आय में वृद्धि हो।
किशोरियों को भी शिक्षा और व्यावसायिक कौशल से जोड़ने पर जोर
राजस्व परिषद की अध्यक्ष-सह-सदस्य हरजोत कौर बम्हरा ने देखभाल सेवाओं और सामाजिक कल्याण की जरूरतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किशोरियों को शुरुआती चरण से ही शिक्षा, भाषा प्रशिक्षण और व्यावसायिक कौशल से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने जीविका के माध्यम से किशोरियों के लिए स्वयं सहायता समूह गठित करने और उन्हें रोजगार से जुड़े प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई। इस पहल का उद्देश्य भविष्य में देखभाल सेवाओं के लिए प्रशिक्षित कार्यबल तैयार करना है। जीविका की अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी अनन्या सिंह ने उद्घाटन सत्र का समापन किया। कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि कौशल विकास और प्रशिक्षण के जरिए महिलाओं की भागीदारी को नए क्षेत्रों तक बढ़ाया जा सकता है।
स्वास्थ्य और घर-आधारित देखभाल सेवाओं पर चर्चा
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में केयर इकोनॉमी के ढांचे को व्यावहारिक कार्ययोजना में बदलने और सेवाओं को बड़े स्तर पर संचालित करने के तरीकों पर विचार-विमर्श हुआ। अनन्या सिंह ने देखभाल सेवाओं के क्रियान्वयन के लिए पांच प्रमुख रास्तों की रूपरेखा प्रस्तुत की। भारत सरकार के परिवार कल्याण मंत्रालय की वरिष्ठ तकनीकी सलाहकार कविता नारायण ने बड़े स्तर पर देखभाल सेवाओं के संचालन से जुड़े अनुभव साझा किए। एम्स पटना में एनेस्थीसिया एवं पैलिएटिव केयर विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. उमेश बधानी ने घर पर दी जाने वाली पैलिएटिव केयर, देखभालकर्ताओं के प्रशिक्षण और सामुदायिक सहयोग के महत्व को समझाया। पैलिएम इंडिया के पद्मश्री डॉ. एमआर राजगोपाल ने सामुदायिक देखभाल के अनुभवों के आधार पर प्रशिक्षित कार्यबल, मानवीय दृष्टिकोण और स्थानीय भागीदारी की जरूरत पर जोर दिया।
बायोगैस और सौर सिंचाई जैसे महिला उद्यमों पर भी जोर
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में नवाचार आधारित उद्यमों को लेकर परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें जीविका के राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों ने अपने अनुभव और विभिन्न पहलों की जानकारी साझा की। इस दौरान कचरे से संपदा तैयार करने की अवधारणा के तहत महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण ऊर्जा तंत्र और बायोगैस जैसे उद्यमों पर चर्चा हुई। इसके अलावा सौर ऊर्जा के माध्यम से टिकाऊ आय के अवसर तैयार करने और महिला-नेतृत्व वाले सौर सिंचाई उद्यमों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। कार्यशाला में विभिन्न विभागों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर केयर इकोनॉमी तथा ग्रामीण उद्यमिता के विस्तार की संभावनाओं पर विचार रखे। आयोजन का व्यापक उद्देश्य बिहार में महिलाओं के कौशल, रोजगार और उद्यमिता के अवसरों को बढ़ाने के लिए व्यावहारिक रास्ते तलाशना रहा।
Care Economy Skill Development कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका उद्देश्य जीविका दीदियों के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित करना और महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा देना था। कार्यशाला में देखभाल सेवाओं को सामाजिक कल्याण, महिला सशक्तिकरण और नियमित आय के अवसरों से जोड़ने पर चर्चा हुई।
जीविका दीदियों की क्षमता बढ़ाने के लिए क्या सुझाव दिए गए?
अपर मुख्य सचिव एचआर श्रीनिवासन ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण और प्रमाणन दिए जाने का सुझाव दिया। साथ ही स्थानीय एवं विदेशी भाषाओं और पेशेवर कौशल विकास पर भी जोर दिया गया।
कार्यशाला में किशोरियों के विकास के बारे में क्या कहा गया?
हरजोत कौर बम्हरा ने किशोरियों को शुरुआती चरण से ही शिक्षा, भाषा प्रशिक्षण और व्यावसायिक कौशल से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उन्होंने जीविका के माध्यम से स्वयं सहायता समूह गठित करने और रोजगार से जुड़े प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
कार्यशाला में किन महिला उद्यमों पर चर्चा की गई?
दूसरे सत्र में बायोगैस, सौर सिंचाई और सौर ऊर्जा आधारित महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों पर चर्चा की गई। कचरे से संपदा तैयार करने की अवधारणा के तहत भी नवाचार आधारित उद्यमों पर परामर्श हुआ।
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