Ranchi- JSSC- संशोधित नियुक्ति नियमावली पर सुनवाई – झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस डा. रवि रंजन और
जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत में जेएसएससी संशोधित नियुक्ति नियमावली के
खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई.
सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से बहस पूरी कर ली गई.
अब सरकार की ओर से जवाब दिया जा रहा है.

JSSC- संशोधित नियुक्ति नियमावली पर सुनवाई
करीब साढ़े तीन घंटे चली सुनवाई के बाद अदालत ने
अगली सुनवाई के लिए पांच सितंबर की तिथि निर्धारित की है.
इस संबंध में रमेश हांसदा सहित अन्य की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है.
सुनवाई के दौरान वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार ने अदालत को बताया कि
राज्य सरकार की ओर से संशोधित नियुक्ति नियमावली में लगाई गई
शर्तों की वजह से वैसे अभ्यर्थी आवेदन नहीं कर पा रहे हैं,
जिन्होंने राज्य के संस्थान से स्नातक की डिग्री प्राप्त की है,
लेकिन लेकिन 10वीं और 12वीं की परीक्षा दूसरे राज्यों से पास ही है.
यह नीति पूरी तरह से भेदभावपूर्ण एवं असंवैधानिक है.
साथ ही यह संविधान के अनुच्छेद 16 और 14 का भी उल्लंघन है.
वहीं, क्षेत्रीय भाषा से हिंदी और अंग्रेजी को हटाया जाना सही नहीं है,
क्योंकि राज्य में 61.25 प्रतिशत लोग हिंदी बोलते है.
सरकार के पास हिंदी को हटाने का कोई आधार नहीं
सरकार के हिंदी को हटाने का भी कोई आधार नहीं है.
इस दौरान अदालत को सुप्रीम कोर्ट के कई आदेशों का हवाला दिया गया.
सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता सुनील कुमार ने अदालत को बताया कि
जेएसएससी ने नियमावली में संशोधन के जरिए यहां की रीति-रिवााज और
भाषा को परखने के लिए एक मापदंड तैयार किया है.
उनकी ओर से कहा गया कि हिंदी मातृभाषा है,
जबकि स्थानीय (देसी) भाषा अगल होती है.
तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के कर्मी स्थानीय लोगों से ज्यादा मिलते-जुलते हैं.
राज्यकर्मियों के लिए स्थानीय भाषा की जानकारी होना जरुरी
राज्य कर्मी को इन भाषाओं का ज्ञान होना ही चाहिए.
इस पर अदालत ने पूछा कि भाषा के जरिये रीति रिवाज को कैसे परखा जा सकता है.
इसके लिए कोई स्टडी भी नहीं की गई है.
अगर ऐसा है तो राज्य में पदस्थापित आइएएस अधिकारियों को इन भाषाओं की जानकारी है क्या,
क्योंकि यही अधिकारी जनता से सीधा संवाद करते हैं.
जब उन्हें बाहर नहीं किया गया है तो तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के लिए ऐसी अनिवार्यता क्यों है?
इस पर सरकार की ओर से अगली सुनवाई के दौरान पूरी जानकारी के साथ उपस्थित होने की जानकारी दी गई.

















