दो दिवसीय शिविर में 60 बिरहोरों का बना आधार कार्ड
कोडरमा : आदिम जनजाति बिरहोर समुदाय के लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए
सरकार की तरफ से ढेरों योजनाएं चलाई जा रही है.
ऐसे में उन योजनाओं का शत प्रतिशत लाभ इन बिरहोरो को मिल सके इसके लिए
उनका आधार कार्ड बनाया जा रहा है.

झरनाकुंड टोला में हैं 100 बिरहोर
मेरा आधार मेरी पहचान, लेकिन झारखंड की पहचान कहे जाने वाले आदिम जनजाति बिरहोर
समुदाय के सैकड़ो लोग आधार कार्ड की नई पहचान से वंचित थे.
बाहरहाल कोडरमा के झुमरीतिलैया स्थित झरनाकुंड नवसृजित प्राथमिक विद्यालय में
आदिम जनजाति बिरहोरो का आधार कार्ड बनवाने को लेकर दो दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया.
इस शिविर में 60 बिरहोरो के आधार कार्ड बनवाए गए.
झरनाकुंड बिरहोर टोला में तकरीबन 100 बिरहोर निवास करते हैं, जिसमें गिने-चुने बिरहोरों का
ही आधार कार्ड बनवाया हुआ था.
विभिन्न बिरहोर टोला में आयोजित किए गए शिविर
झरनाकुंड में बिरहोरों की संख्या लगातार बढ़ रही है.
परिवार में आधार कार्ड से वंचित रहने के कारण नए सदस्यों को किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था, जिसकी शिकायत लगातार जिला प्रशासन तक पहुंच रही थी. बहरहाल विशेष शिविर का आयोजन कर झरनाकुंड के अलावे जिले के विभिन्न बिरहोर टोला में शिविर आयोजित किए जा रहे हैं. आधार कार्ड से वंचित बिरहोरों का आधार कार्ड बनवाया जा रहा है, जिसमें महिलाओं और बच्चों की संख्या ज्यादा है.
आधार कार्ड से जुड़ने के बाद मिली नई पहचान
आमतौर पर आदिम जनजाति बिरहोर समुदाय के लोग अब तक समाज की मुख्यधारा से पूरी तरह से
नहीं जुड़ पाए हैं और अभी भी जंगलों में निवास करना ज्यादा पसंद करते हैं.
ऐसे में इन बिरहोरो को आधार कार्ड के लिए शिविर तक लाना भी बड़ी चुनौती थी.
बिरहोर समुदाय के लोगों को सरकार की ओर से मुफ्त राशन के अलावे पेंशन भी दिया जाता है लेकिन
आधार कार्ड नहीं होने की वजह से सरकारी योजनाओं के लाभ से कई बिरहोर वंचित थे. लेकिन, अब आधार कार्ड से जुड़ जाने के बाद इन्हें नई पहचान मिल गई है और अब सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिलने लगेगा.
रिपोर्ट: कुमार अमित
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