ACB Court Verdict: 500 रुपये घूस लेने वाले पूर्व पंचायत सेवक को 20 साल बाद सजा, 80 वर्ष की उम्र में जाना होगा जेल

गुमला के पूर्व पंचायत सेवक को 500 रुपये रिश्वत लेने के मामले में एसीबी कोर्ट ने एक साल की सजा सुनाई है। 20 साल पुराने मामले में 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।


ACB Court Verdict रांची: भ्रष्टाचार से जुड़े 20 वर्ष पुराने मामले में एसीबी के विशेष न्यायाधीश ओंकारनाथ चौधरी की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने रिश्वत लेने के दोषी पूर्व पंचायत सेवक सत्यनारायण राम को एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। वर्तमान में उनकी उम्र लगभग 80 वर्ष है। अदालत ने उन पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

अदालत के आदेश के अनुसार यदि दोषी जुर्माने की राशि जमा नहीं करते हैं तो उन्हें आठ महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।

ACB Court Verdict: इंदिरा आवास योजना की रिपोर्ट भेजने के लिए मांगी थी घूस

मामले के अनुसार सत्यनारायण राम वर्ष 2006 में गुमला जिले के सिसई प्रखंड में पंचायत सेवक के पद पर कार्यरत थे। आरोप था कि उन्होंने इंदिरा आवास योजना से संबंधित रिपोर्ट आगे भेजने के एवज में आवेदक नसीम खान से 500 रुपये रिश्वत की मांग की थी।

शिकायतकर्ता ने इसकी सूचना निगरानी ब्यूरो को दी थी। शिकायत की जांच के बाद ब्यूरो ने जाल बिछाकर कार्रवाई की योजना बनाई।


Key Highlights

  • 20 साल पुराने रिश्वत मामले में पूर्व पंचायत सेवक दोषी करार

  • एसीबी कोर्ट ने सुनाई एक वर्ष के कारावास की सजा

  • 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया

  • इंदिरा आवास योजना की रिपोर्ट भेजने के बदले मांगी थी रिश्वत

  • 2006 में निगरानी ब्यूरो ने रंगेहाथ किया था गिरफ्तार


ACB Court Verdict: 500 रुपये लेते रंगेहाथ गिरफ्तार हुए थे

निगरानी ब्यूरो की टीम ने 7 अप्रैल 2006 को कार्रवाई करते हुए सत्यनारायण राम को 500 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया और जांच के बाद आरोप पत्र दाखिल किया गया।

लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर उन्हें दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

ACB Court Verdict: पहले भी काट चुके हैं पांच माह 20 दिन की जेल

मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि अभियुक्त पूर्व में इस मामले में पांच माह 20 दिन जेल में रह चुके हैं। अब अदालत के ताजा फैसले के बाद उन्हें निर्धारित सजा का पालन करना होगा।

यह फैसला एक बार फिर दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कानूनी प्रक्रिया भले लंबी हो, लेकिन दोष सिद्ध होने पर कानून अपना काम करता है और आरोपी को सजा का सामना करना पड़ता है।

 

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