रांची: झारखंड में बहुचर्चित 38 करोड़ रुपये के शराब घोटाले की जांच तेज़ हो गई है। गुरुवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने इस मामले में गिरफ्तार तीन प्रमुख आरोपियों से पुलिस रिमांड पर पूछताछ शुरू कर दी। पूछताछ किए जा रहे आरोपियों में झारखंड स्टेट बेवरेजेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के तत्कालीन महाप्रबंधक (संचालन सह वित्त) सुधीर कुमार, तत्कालीन महाप्रबंधक (वित्त) सुधीर कुमार दास और ठेका प्रदाता मार्शन कंपनी के प्रतिनिधि नीरज कुमार शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि इन तीनों को एसीबी ने 21 मई को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। लेकिन जांच के दौरान नए तथ्य सामने आने के बाद एजेंसी ने अदालत से पुलिस रिमांड की अनुमति मांगी, जो मिल गई। इसके बाद से ही इन अधिकारियों को निलंबित भी कर दिया गया।
एसीबी अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि सुधीर कुमार और सुधीर दास के कार्यकाल के दौरान मार्शन कंपनी द्वारा जमा की गई फर्जी बैंक गारंटी के बावजूद कंपनी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि मैनपावर सप्लाई के नाम पर कंपनी को किस आधार पर भुगतान किया गया।
नीरज कुमार से कंपनी द्वारा दी गई फर्जी बैंक गारंटी को लेकर विस्तृत पूछताछ की गई है। सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को एसीबी ने कुछ अन्य लोगों से भी पूछताछ की है, लेकिन उनके नामों का फिलहाल खुलासा नहीं किया गया है।
रिश्वत मामले में अभियंता ने मांगी जमानत
एक अन्य मामले में ग्रामीण विकास विभाग के कार्यपालक अभियंता सनौत सोरेन ने एसीबी की विशेष अदालत में जमानत याचिका दाखिल की है। ज्ञात हो कि उन्हें पिछले गुरुवार को 60 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था। उनके घर से 16.89 लाख रुपये नकद भी बरामद हुए थे।
यह रिश्वत एक ठेकेदार से ली जा रही थी जिसने जोन्हा में डेढ़ किमी सड़क निर्माण का कार्य पूरा किया था और 19 लाख रुपये का बिल पास कराने के लिए अभियंता ने तीन प्रतिशत कमीशन की मांग की थी। मामले में शुक्रवार को सुनवाई होनी है।
गौरतलब है कि ग्रामीण विकास विभाग में रिश्वतखोरी को लेकर पहले भी प्रवर्तन निदेशालय (ED) कार्रवाई कर चुकी है, जिसमें तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
एसीबी सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है ताकि मजबूत साक्ष्य एकत्र किए जा सकें और आरोपियों को न्याय के कठघरे में लाया जा सके।



















